केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने जारी की रणनीति, 2070 तक शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य
बिजली उत्पादन में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने व कार्बन घटाने के लिए भारत ग्रीन हाइड्रोजन व परमाणु ऊर्जा का उपयोग बढ़ाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। भारत ने उत्सर्जन घटाने के लिए तैयार दीर्घकालीन रणनीति का खुलासा ‘एलटी-एलईडीएस’ में किया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कॉप27 के दौरान यह रूपरेखा जारी की। यादव ने बताया, भारत यह नीति जारी करने वाले 60 देशों में शामिल हो गया है।
2070 तक भारत ने ‘जीरो नेट एमिशन’ का लक्ष्य रखा है। भारत के मुताबिक, विश्व की 17 प्रतिशत आबादी होने पर भी वैश्विक अनुपात में उत्सर्जन नाममात्र है। भारत ने ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह नीति बनाई है। 2015 के पेरिस समझौते के तहत सभी देशों को 2020 तक एलटी-एलईडीएस जारी करनी थी। इसमें उत्सर्जन घटाने के लिए बिजली, शहरीकरण, परिवहन, वन, वित्त और उद्योगों से जुड़े कदमों की जानकारी देनी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके जरिए पृथ्वी के तापमान में हो रही वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर सीमित रखने में बड़ी मदद मिलेगी।
नई रणनीति के अहम बिंदु... वादे व इरादे
- बिजली उत्पादन : कोयले, पेट्रोल, डीजल की जगह अक्षय ऊर्जा का उपयोग धीरे धीरे बढ़ाएंगे। नेशनल हाइड्रोजन मिशन से भारत ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा का हब बनेगा। ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण और परमाणु ऊर्जा क्षमता साल 2032 तक तीन गुना तक बढ़ाना है। सौर ऊर्जा से भी बिजली हासिल की जा रही है।
- परिवहन व्यवस्था : बायोफ्यूल को बढ़ावा दिया जाएगा। 2025 तक वाहन ईंधन में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत तक पहुंचाई जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाने पर जोर। सार्वजनिक सरकारी यात्री परिवहन व माल ढुलाई में बदलाव लाए जा रहे हैं।
- बेहतर डिजाइन : शहरों में ऊर्जा खपत व इमारतों की परंपरागत निर्माण सामग्री में कमी पर जोर रहेगा। स्मार्ट सिटी, ग्रीन बिल्डिंग कोड और ठोस व तरल कचरे के बेहतर प्रबंधन पर जोर।
- औद्योगिक क्षेत्र : उत्सर्जन घटाने के लिए इनोवेटिव तरीके अपनााएंगे, जिनका ऊर्जा सुरक्षा व आर्थिकी पर असर न हो। आत्मनिर्भर भारत व मेक इन इंडिया योजना का भी ख्याल रखा जाएगा।
- जंगलों और वृक्षों में वृद्धि : 2016 में जंगल और वृक्ष आवरण 15 प्रतिशत कार्बन सोखने में मदद कर रहे थे। सरकार का मानना है कि जंगलों व वृक्ष आवरण को बढ़ाकर 2030 तक 300 करोड़ टन कार्बन अतिरिक्त कम करेंगे। तीन दशकों की सफलता के आधार पर दावा किया गया देश में जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी वैश्विक औसत से कम हैं।
- सस्ता नहीं कार्बन घटाना : रिपोर्ट के अनुसार, कार्बन घटाने के लिए नई तकनीकों, बुनियादी ढांचे और अन्य खर्च में वृद्धि होगी। 2050 तक इस पर लाखों करोड़ रुपये की लागत आ सकती है। इसके आर्थिक असर व वित्तीय नुकसान का भी हमें ध्यान रखना होगा। विकसित देशों द्वारा जलवायु क्षेत्र के लिए वित्तीय सहयोग इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किसका कितना कार्बन उत्सर्जन
- 509 गीगाटन कार्बन उत्सर्जन किया अमेरिका ने वर्ष 1850 से अब तक
- 20% है पूरी पृथ्वी पर हुए उत्सर्जन का।
- 11% के साथ चीन दूसरे और 7% के साथ रूस तीसरे स्थान पर
- भारत 3.4 प्रतिशत के साथ सातवें स्थान पर
- ग्लोबल कार्बन बजट रिपोर्ट 2022 का दावा है कि 2021 में दुनिया का आधा कार्बन उत्सर्जन तीन प्रमुख देशों से हो रहा है।
- इसमें चीन 31%, अमेरिका 14% व यूरोपीय संघ की 8% हिस्सेदारी है।
कार्बन उत्सर्जन में बाकी देशों से बहुत पीछे है भारत
यूएन के पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में भारत अमीर व विकसित देशों से बहुत पीछे है। भारत में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन 2.4 टन है, जो विश्व के औसत 6.3 टन से कहीं कम है।
(विश्लेषक एजेंसी ‘कार्बन ब्रीफ’ के अनुसार)