मंकीपॉक्स संक्रमण से निपटने के लिए डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो ने टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया। यूरोपीय संघ और अमेरिका से 2.65 लाख टीके मिलने के बाद कांगो ने लोगों का टीकाकरण होने लगा है। कांगो अधिकारियों ने शनिवार को गोमा शहर में खुराकें वितरित कीं।
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इस बार एमपॉक्स संक्रमण के चलते 859 से ज्यादा मौत हुई हैं। जबकि 30 हजार से अधिक संदिग्ध मामले हैं। जो इस साल अफ्रीका में दर्ज किए गए सभी मामलों का 80 फीसदी और मौतों का 99 फीसदी है। इसे लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक आपातकाल घोषित किया है।
कांगो के स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने कहा कि टीकाकरण अभियान शनिवार से शुरू कर दिया गया। खुराकें केवल जोखिम वाले क्षेत्रों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दी जाएंगीं। टीकाकरण के लिए योजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही बच्चों के लिए स्वीकृत टीके की कम से कम 30 लाख खुराकें जापान से आने की उम्मीद है।
दरअसल दुनिया के कई देश इन दिनों मंकीपॉक्स का संक्रमण झेल रहे हैं। अफ्रीकी देशों से शुरू हुआ ये वायरल संक्रमण यूएस-यूके सहित कई एशियाई देशों में भी बढ़ता जा रहा है। वायरल जूनोटिक रोग से मध्य और पश्चिमी अफ्रीका के देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
क्या है एमपॉक्स संक्रमण
एमपॉक्स एक वायरल संक्रमण है जो संक्रमित वस्तुएं, निकट संपर्क, और शरीर के तरल पदार्थों से फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति द्वारा उपयोग की गई वस्तुएं जैसे कपड़े, चादर, तौलिए आदि के इस्तेमाल से बचें। संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ या घाव के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। सामुदायिक तौर पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।
भारत में भी जारी है अलर्ट
मंकीपॉक्स के खतरे को देखते हुए 14 अगस्त को डब्ल्यूएचओ ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया था। बढ़ते खतरे के देखते हुए भारत को भी अलर्ट रहने की सलाह दी गई है। मंकीपॉक्स के जोखिमों को देखते हुए भारत सरकार ने तैयारियों को बढ़ाने और संभावित प्रकोप को कम करने के लिए कई उपाय किए हैं। संक्रमण की आशंका की स्थिति में रोगियों के इलाज के लिए कुछ अस्पतालों को चिन्हित किया गया है। भारत सरकार ने स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए मंकीपॉक्स के मामलों को प्रभावी ढंग से पहचानने और प्रबंधित करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं।