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अंतिम कड़ी: पीओके में गैर कश्मीरियों को बसाने के लिए पाकिस्तान ने खेला ये खेल

रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Sat, 31 Aug 2019 07:22 PM IST
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पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के मुजफ्फराबाद का सरकारी कन्या विद्यालय - फोटो : Dunia News

पाक अधिकृत कश्मीर पर आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं इस सीरीज की तीसरी व अंतिम कड़ी। इसमें बताएंगे कि किस धूर्तता के साथ पाकिस्तान ने पीओके में गैर कश्मीरियों यानी पाकिस्तानियों को बसाने के लिए चाल चली। इसके लिए कानून को तोड़ा मरोड़ा गया। 

पाकिस्तान की हायतौबा

भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर लद्दाख को उससे अलग किया और उधर पाकिस्तान हायतौबा मचाने लगा। वो कश्मीर मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की पुरजोर कोशिश कर चुका है और अब भी कर रहा है। यह सब वो तब कर रहा है जब उसने खुद कश्मीर के काफी बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है। पिछले 70 साल से पाकिस्तान अपनी इस हरकत को सही साबित करने की असफल कोशिश भी कर रहा है।

पराया माल अपना

आधे कश्मीर पर अवैध कब्जा करने के बाद पाकिस्तान ने इसे दो हिस्सों में बांट दिया था। एक हिस्से को तथाकथित रूप से आजाद कश्मीर नाम दिया और दूसरे हिस्से को संघ प्रशासित उत्तरी क्षेत्र (फेडरल एडमिनिस्टर्ड नॉर्दर्न एरिया) कहा गया। 

कानूनी चोगा

1969 में पाकिस्तान ने एक सलाहकार परिषद का गठन किया, जो इस संघ प्रशासित उत्तरी क्षेत्र का प्रशासन चलाने में मदद करती थी। इसके बाद 1994 में इस परिषद को उत्तरी क्षेत्र परिषद नाम दे दिया गया, जिससे इसे कानूनी रूप से वैध साबित किया जा सके। इसके पांच वर्ष बाद उत्तरी क्षेत्र का एक बार फिर नाम बदला गया और अब इसे उत्तरी क्षेत्र विधान परिषद कहा जाने लगा।

अंधेर नगरी चौपट राजा

इस बदलाव के साथ ही गिलगित बाल्टिस्तान परिषद को विधान सभा की माना जाने लगा। इस विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को यह अधिकार दिया गया कि वो राज्य विषय के 63 मामलों को कानून बनाकर खत्म कर सकते हैं। साथ ही वो गिलगित बाल्टिस्तान की विधानसभा या असेंबली के आदेशों को भी निरस्त कर सकते हैं। 2018 में इस असेंबली ने अपने आदेश में एक और संशोधन किया और पाकिस्तानी राष्ट्रपति को भी शक्तियां प्रदान कीं।

कश्मीरी नियमों को खत्म कर चुका है पाकिस्तान

आजादी के पहले 1927 में जम्मू-कश्मीर रियासत ने स्टेट सब्जेक्ट रूल (राज्य विषय नियम) नाम का एक कानून बनाया था, जिसके तहत रियासत के सीमाक्षेत्र में कोई भी बाहरी व्यक्ति या संस्था जमीन नहीं खरीद सकती थी। लेकिन पाकिस्तान सरकार ने गिलगित बाल्टिस्तान में इस नियम को खत्म कर दिया। इससे इस क्षेत्र में गैर कश्मीरियों यानी पाकिस्तानियों को बसाने का रास्ता साफ हो गया।



यही कदम तथाकथित आजाद जम्मू-कश्मीर में भी उठाया गया। जिससे पीओके में चीन का निवेश बढ़ाया जा सके और गैर-कश्मीरी आबादी की बसाहट बढ़ाई जा सके। यह सबकुछ पाकिस्तान वहां कर रहा है, जो उसका नहीं भारत का हिस्सा है। लेकिन जब भारत ने एक देश एक संविधान की स्थिति लागू की तो पाकिस्तान ने इसे अमानवीय और गैरकानूनी कहा।

यूएन के नाम का झुनझुना

पाकिस्तान लगातार यह कह रहा है कि जम्मू-कश्मीर को दिया गया विशेष राज्य का दर्जा हटाकर भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अपमान किया है। लेकिन यह पूरी तरह झूठ है। क्योंकि भारत ने नहीं, बल्कि पाकिस्तान ने अवैध कब्जे वाले हिस्से को हर तरह से अपना बनाने की तिकड़म की है। स्टेट सब्जेक्ट रूल को खत्म करना इसी की बानगी है।

पाक ने ऐसा क्यों किया

कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान में शिया और इस्मायली आबादी ज्यादा थी। लेकिन 1998 से 2011 के बीच पाकिस्तान ने यहां सुन्नी आबादी बसाई। इस तरह से वो इस क्षेत्र की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान से छेड़छाड़ करता रहा। पाकिस्तान के फौजी शासक जनरल जिया उल हक और उनके बाद के शासकों ने इस क्षेत्र में स्टेट सब्जेक्ट रूल को लगातार कमजोर ही किया।

सफेद झूठ

पाकिस्तान का दावा है कि 28 अप्रैल 1949 को पाक सरकार के एक मंत्री और तथाकथित आजाद कश्मीर के राष्ट्रपति के बीच एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें आजाद कश्मीर के राष्ट्रपति ने गिलगित बाल्टिस्तान का प्रशासनिक नियंत्रण पाकिस्तान सरकार को हस्तांतरित कर दिया था। लेकिन जिस तथाकथित राष्ट्रपति इब्राहिम का नाम इन कागजातों पर दर्ज है वो सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी भी अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर चुका है।

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पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के मुजफ्फराबाद का सरकारी कन्या विद्यालय - फोटो : Dunia News
पाक अधिकृत कश्मीर पर आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं इस सीरीज की तीसरी व अंतिम कड़ी। इसमें बताएंगे कि किस धूर्तता के साथ पाकिस्तान ने पीओके में गैर कश्मीरियों यानी पाकिस्तानियों को बसाने के लिए चाल चली। इसके लिए कानून को तोड़ा मरोड़ा गया। 

पाकिस्तान की हायतौबा

भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर लद्दाख को उससे अलग किया और उधर पाकिस्तान हायतौबा मचाने लगा। वो कश्मीर मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की पुरजोर कोशिश कर चुका है और अब भी कर रहा है। यह सब वो तब कर रहा है जब उसने खुद कश्मीर के काफी बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है। पिछले 70 साल से पाकिस्तान अपनी इस हरकत को सही साबित करने की असफल कोशिश भी कर रहा है।

पराया माल अपना

आधे कश्मीर पर अवैध कब्जा करने के बाद पाकिस्तान ने इसे दो हिस्सों में बांट दिया था। एक हिस्से को तथाकथित रूप से आजाद कश्मीर नाम दिया और दूसरे हिस्से को संघ प्रशासित उत्तरी क्षेत्र (फेडरल एडमिनिस्टर्ड नॉर्दर्न एरिया) कहा गया। 

कानूनी चोगा

1969 में पाकिस्तान ने एक सलाहकार परिषद का गठन किया, जो इस संघ प्रशासित उत्तरी क्षेत्र का प्रशासन चलाने में मदद करती थी। इसके बाद 1994 में इस परिषद को उत्तरी क्षेत्र परिषद नाम दे दिया गया, जिससे इसे कानूनी रूप से वैध साबित किया जा सके। इसके पांच वर्ष बाद उत्तरी क्षेत्र का एक बार फिर नाम बदला गया और अब इसे उत्तरी क्षेत्र विधान परिषद कहा जाने लगा।

अंधेर नगरी चौपट राजा

इस बदलाव के साथ ही गिलगित बाल्टिस्तान परिषद को विधान सभा की माना जाने लगा। इस विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को यह अधिकार दिया गया कि वो राज्य विषय के 63 मामलों को कानून बनाकर खत्म कर सकते हैं। साथ ही वो गिलगित बाल्टिस्तान की विधानसभा या असेंबली के आदेशों को भी निरस्त कर सकते हैं। 2018 में इस असेंबली ने अपने आदेश में एक और संशोधन किया और पाकिस्तानी राष्ट्रपति को भी शक्तियां प्रदान कीं।

कश्मीरी नियमों को खत्म कर चुका है पाकिस्तान

आजादी के पहले 1927 में जम्मू-कश्मीर रियासत ने स्टेट सब्जेक्ट रूल (राज्य विषय नियम) नाम का एक कानून बनाया था, जिसके तहत रियासत के सीमाक्षेत्र में कोई भी बाहरी व्यक्ति या संस्था जमीन नहीं खरीद सकती थी। लेकिन पाकिस्तान सरकार ने गिलगित बाल्टिस्तान में इस नियम को खत्म कर दिया। इससे इस क्षेत्र में गैर कश्मीरियों यानी पाकिस्तानियों को बसाने का रास्ता साफ हो गया।

यही कदम तथाकथित आजाद जम्मू-कश्मीर में भी उठाया गया। जिससे पीओके में चीन का निवेश बढ़ाया जा सके और गैर-कश्मीरी आबादी की बसाहट बढ़ाई जा सके। यह सबकुछ पाकिस्तान वहां कर रहा है, जो उसका नहीं भारत का हिस्सा है। लेकिन जब भारत ने एक देश एक संविधान की स्थिति लागू की तो पाकिस्तान ने इसे अमानवीय और गैरकानूनी कहा।

यूएन के नाम का झुनझुना

पाकिस्तान लगातार यह कह रहा है कि जम्मू-कश्मीर को दिया गया विशेष राज्य का दर्जा हटाकर भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अपमान किया है। लेकिन यह पूरी तरह झूठ है। क्योंकि भारत ने नहीं, बल्कि पाकिस्तान ने अवैध कब्जे वाले हिस्से को हर तरह से अपना बनाने की तिकड़म की है। स्टेट सब्जेक्ट रूल को खत्म करना इसी की बानगी है।

पाक ने ऐसा क्यों किया

कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान में शिया और इस्मायली आबादी ज्यादा थी। लेकिन 1998 से 2011 के बीच पाकिस्तान ने यहां सुन्नी आबादी बसाई। इस तरह से वो इस क्षेत्र की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान से छेड़छाड़ करता रहा। पाकिस्तान के फौजी शासक जनरल जिया उल हक और उनके बाद के शासकों ने इस क्षेत्र में स्टेट सब्जेक्ट रूल को लगातार कमजोर ही किया।

सफेद झूठ

पाकिस्तान का दावा है कि 28 अप्रैल 1949 को पाक सरकार के एक मंत्री और तथाकथित आजाद कश्मीर के राष्ट्रपति के बीच एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें आजाद कश्मीर के राष्ट्रपति ने गिलगित बाल्टिस्तान का प्रशासनिक नियंत्रण पाकिस्तान सरकार को हस्तांतरित कर दिया था। लेकिन जिस तथाकथित राष्ट्रपति इब्राहिम का नाम इन कागजातों पर दर्ज है वो सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी भी अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर चुका है।

कश्मीर का पूरा किस्सा

  • 1946 में कश्मीर के नेता शेख अब्दुल्ला ने 'महाराजा कश्मीर छोड़ो' आंदोलन छेड़ दिया था। शेख गिरफ्तार कर लिए गए और उन्हें तीन साल की सजा भी हुई थी।
  • 1846: महाराजा गुलाब सिंह ने अंग्रेजों से कश्मीर खरीदकर जम्मू-कश्मीर बनाया।
  • 1846: जम्मू और लद्दाख के शासक महाराजा गुलाब सिंह ने ईस्ट इंडिया कंपनी से छीना था। इस तरह जम्मू-कश्मीर बना। तब यह 2.1 लाख वर्ग किमी में फैला था।
  • 1932: कश्मीरी नेता शेख अब्दुल्ला ने कश्मीर को हरिसिंह से छुड़ाने के लिए लड़ाई छेड़ी। ऑल जम्मू एंड कश्मीर मुस्लिम कांफ्रेंस का गठन किया।
  • 1947: मार्च में कश्मीर के पुंछ क्षेत्र में एकबार फिर विरोध के स्वर उभरे। लेकिन महाराजा हरिसिंह ने इस पर काबू पा लिया।

आजादी के बाद 

  • 1947: पाक समर्थित कबाइली लड़ाकों ने कश्मीर पर हमला किया।
  • इस बीच 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरिसिंह ने भारत के साथ विलय संधि पर हस्ताक्षर किए।
  • तब तक गिलगित-बाल्टिस्तान हाथ से निकल गया।
  • 1948 में भारत ने कश्मीर मुद्दे को यूएन में उठाया।
  • 1950 में चीन ने पश्चिमी कश्मीर पर कब्जा किया।
  • 1962 में चीन ने अक्साई चीन पर हुए युद्ध में भारत को हरा दिया।
  • 1965, 1971-72 में पाक ने दो हमले किए। दोनों में उसे हार मिली।
  • पाक कबाइलियों ने कश्मीर पर हमला किया।
  • तब इन्हें जवाब देने के लिए कश्मीरी महिलाओं ने फौज बनाकर इनका सामना किया था।
  • हरिसिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को भारत में विलय के लिए संधि पत्र पर हस्ताक्षर किए।

विद्रोह की शुरुआत 

  • बीते 30 साल में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की 70 हजार से ज्यादा घटनाएं, 44 हजार से ज्यादा मौतें, इनमें 5 हजार से ज्यादा जवान शहीद हुए।
  • 1987 में पाकिस्तान के इशारे पर चुनाव में धांधली का आरोप लगा उठाए थे हथियार।
  • 1987 में चुनाव में धांधली का आरोप लगा पाकिस्तान के इशारे पर कुछ नेताओं ने हथियार उठाए। इस तरह आतंक और अलगाववाद शुरू हो गया।
  • 1990: घाटी से हिंदुओं को चुन चुन कर मारा गया। इसी दौरान पाकिस्तान ने आतंकियों को ट्रेनिंग देकर देश में हमले कराए।
  • 1999: पाक का करगिल पर कब्जे का प्रयास। उसे हार मिली। 2001-2004 के दिल्ली में संसद और जम्मू कश्मीर विधानसभा पर आतंकी हमला।
  • 2014: पाकिस्तान उच्चायुक्त अलगाववादी नेताओं से मिले। भारत ने वार्ता रद्द की। इस बीच पीडीपी-भाजपा सरकार बनी।
  • 17 अक्तूबर 1949 का ऐतिहासिक दिन जब कश्मीर को विशेष दर्जे के लिए अनुच्छेद 370 लागू हुआ था।
  • 26 अक्टूबर 1947 को दो पन्नों का जम्मू-कश्मीर इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन अस्तित्व में आया। यानी उस दिन कश्मीर भारत का हिस्सा हो गया।
  • 17 अक्टूबर 1949 को अनुच्छेद 370 लाया गया। इसके तहत जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान और झंडा तय किया गया। इसी पर विवाद था।
  • 14 मई 1954 को 35ए आया। इसके तहत बाहरी राज्यों के लोगों के नागरिक बनने पर रोक लगी।
  • तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की मौजूदगी में राजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर का विलय भारत में कराया।

अनुच्छेद 370 बदलने और 35ए हटने से यह सुविधाएं बढ़ीं

  • महिलाओं को मिला हक: जम्मू-कश्मीर की महिलाएं बाहर के व्यक्ति से शादी कर लेती थीं तो उनका संपत्ति का अधिकार खत्म हो जाता था। अब ऐसा नहीं होगा।
  • सरकारी नौकरी में बराबरी: अनुच्छेद-35 हटनेसे बाहरी राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में संपत्ति खरीदकर रह सकेंगे। सरकारी नौकरी भी पा सकेंगे।
  • दोहरी नागरिकता अब नहीं: जम्मू-कश्मीर के लोगों के पास दोहरी नागरिकता थी। वोट का हक सिर्फ स्थायी नागरिकों को था। अब कोई भी नागरिक वोटर बन सकेगा।
  • बेटियों की संतानों का अधिकार: राज्य से बाहर शादी करनेवाली महिलाओं के बच्चों को यहां संपत्ति में हक नहीं मिलता था। लेकिन, अब ऐसे बच्चे यहां हकदार होंगे।
  • पाकिस्तानी अब नहीं बसेंगे: कश्मीरी महिला अगर पाकिस्तानी से शादी करती थी, तो उसके पति को नागरिकता मिल जाती थी। लेकिन अब यह मुमकिन नहीं होगा।
  • शरणार्थियों को नागरिकता: कश्मीर में बसे हजारों शरणार्थी अब सरकारी नौकरी हासिल नहीं कर सकते थे। ये सरकारी शिक्षण संस्थानों में भी दाखिला ले पाएंगे।
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