Sri Lanka: पिछले महीने अमेरिका ने श्रीलंका के समक्ष चीनी अनुसंधान जहाज की निर्धारित यात्रा के बारे में चिंता व्यक्त की थी संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर न्यूयॉर्क में श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी से मुलाकात करने वाली अमेरिका की उप सचिव विक्टोरिया नूलैंड ने कथित तौर पर 'शी यान 6' की यात्रा को लेकर चिंता जताई थी।
अमेरिका की ओर से सुरक्षा चिंताओं के बीच चीन का एक शोध जहाज बुधवार को कोलंबो बंदरगाह पहुंचा। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, "शी यान 6 को रिफ्यूलिंग के लिए (कोलंबो) बंदरगाह में प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी।"
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सूत्रों के अनुसार, श्रीलंका भारत की ओर से उठाई गई सुरक्षा चिंताओं के कारण शी यान 6 के आगमन की अनुमति देने में देरी कर रहा था। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह स्पष्ट नहीं है कि जहाज कब तक कोलंबो बंदरगाह पर खड़ा रहेगा। राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की पिछले सप्ताह चीन यात्रा के बाद शी यान 6 का आगमन हुआ।
अगस्त में, कोलंबो की ओर से कहा गया था कि चीनी अनुसंधान पोत श्रीलंका की राष्ट्रीय जलीय संसाधन अनुसंधान और विकास एजेंसी (एनएआरए) के सहयोग से समुद्री अनुसंधान गतिविधियों के लिए अक्टूबर में आने वाला है। चीन के अनुसंधान/सर्वेक्षण पोत की वहन क्षमता 1,115 डीडब्ल्यूटी बताई गई है। वेसेल की कुल लंबाई 5.3 मीटर और चौड़ाई 17 मीटर बताई गई है। जहाज की कुल लंबानी 90 मीटर बताई गई है।
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पिछले महीने अमेरिका ने श्रीलंका के समक्ष चीनी अनुसंधान जहाज की निर्धारित यात्रा के बारे में चिंता व्यक्त की थी संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर न्यूयॉर्क में श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी से मुलाकात करने वाली अमेरिका की उप सचिव विक्टोरिया नूलैंड ने कथित तौर पर 'शी यान 6' की यात्रा को लेकर चिंता जताई थी। चीन नियमित आधार पर श्रीलंका में अपने अनुसंधान/निगरानी पोत भेजता है।
भारत भी श्रीलंका में चीनी जहाजों की यात्रा पर चिंता जताता रहा है। इस साल अगस्त में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी का युद्धपोत हाई यांग 24 हाओ दो दिवसीय यात्रा पर श्रीलंका पहुंचा था। यह बताया गया था कि भारत द्वारा उठाई गई चिंताओं के कारण़ 129 मीटर लंबे जहाज के आगमन में देरी हुई।
पिछले साल अगस्त में चीनी बैलिस्टिक मिसाइल और उपग्रह ट्रैकिंग जहाज युआन वांग 24 के इसी तरह के दौरे पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। नई दिल्ली में इस बात को लेकर आशंका जताई जा रही थी कि पोत की ट्रैकिंग प्रणाली श्रीलंकाई बंदरगाह के रास्ते में भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों की जासूसी करने का प्रयास कर सकती है।