लद्दाख गतिरोध (Ladakh standoff) को हल करने के लिए हाल ही में भारत-चीन के बीच कोर कमांडर स्तर के 16वें दौर की वार्ता (India-China military talks) हुई है। जिसमें कुछ मुद्दों पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच आम सहमति बनी है। इसी क्रम में चीनी सेना ने गुरुवार को एक बयान जारी किया है। जिसमें उसने कहा है कि कोर कमांडर स्तर की बैठक में चार सूत्री 'आम सहमति' बनी है। इसमें द्विपक्षीय संबंधों को फिर से शुरू करने की गति में निरंतरता, मतभेदों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना और सुरक्षा सहित भारत की सीमा पर स्थिरता कायम करना शामिल है।
16वें दौर की चीन-भारत कोर कमांडर-स्तर की बैठक पर टिप्पणी करते हुए चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने कहा, 'बैठक में दोनों पक्षों ने रचनात्मक और दूरंदेशी तरीके से मुद्दों पर चर्चा की। वार्ता में दोनों पक्ष चार आम सहमति पर पहुंचे। इस दौरान कमांडरों की बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर विवाद को निपटाने पर चर्चा की।
आम सहमति के बिंदुओं को लेकर उन्होंने कहा कि इसके तहत राजनीतिक मार्गदर्शन का पालन करना और दोनों देशों के नेताओं द्वारा प्राप्त महत्वपूर्ण सहमति को गंभीरता से लागू करना है। उन्होंने कहा कि दूसरी आम सहमति एलएसी पर समग्र स्थिति पर ध्यान केंद्रित करने और द्विपक्षीय संबंधों की बहाली की गति को बनाए रखने पर बनी है। साथ ही मतभेदों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित और नियंत्रित करना है। इसके साथ ही दोनों पक्षों के बीच संचार और बातचीत को बनाए रखने और जल्द से जल्द एक पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान तक पहुंचने पर भी सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में चीन और भारत के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति स्थिर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों पक्षों के बीच सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से संचार कभी बंद नहीं हुआ है। गौरतलब है कि 16वें दौर की भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की बैठक 17 जुलाई को भारत की तरफ चुशुल-मोल्दो सीमा मिलन स्थल पर हुई थी। इसमें दोनों पक्षों ने पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी के मुद्दों के समाधान के लिए रचनात्मक और दूरदर्शी तरीके से चर्चा जारी रखी।
पूर्वी लद्दाख विवाद पर सैन्य वार्ता पर भारत-चीन संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच खुले रूप से एवं गहराई से विचारों का आदान-प्रदान हुआ। दोनों पक्षों ने फिर से पुष्टि की कि शेष मुद्दों के समाधान से पश्चिमी क्षेत्र में LAC के साथ शांति बहाल करने में मदद मिलेगी और द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति को सक्षम बनाया जा सकेगा। दोनों पक्ष पश्चिमी क्षेत्र में जमीन पर सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने पर सहमत हुए।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्ष संपर्क में रहने और सैन्य एवं राजनयिक माध्यमों की मदद से बातचीत बनाए रखने और शेष मुद्दों को पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर जल्द से जल्द काम करने पर सहमत हुए। इससे पहले भारत और चीन के बीच 16वें दौर की सैन्य वार्ता रविवार को करीब साढ़े बारह घंटे तक चली। इस दौरान भारत ने फिर से चीन पर दबाव डाला कि वह पूर्वी लद्दाख के विवाद वाले क्षेत्रों से सेना पूरी तरह पीछे हटाए और अप्रैल 2020 की यथास्थिति की बहाली की मांग की।
गौरतलब है कि पैंगोंग झील इलाके में चीन और भारत की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प के बाद 5 मई, 2020 को पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध शुरू हो गया था। जिसके बाद दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे हजारों सैनिकों के साथ-साथ भारी हथियारों की तैनाती की थी। इस समय संवेदनशील क्षेत्र, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों पक्षों के लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं।