न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत की भागीदारी को लेकर चल रही जोर-आजमाइशों के बीच चीन ने चुप्पी तोड़कर नरमी दिखाई है। ग्रुप में भारत की दावेदारी पर चीन एक आमराय बनाने के लिए तैयार है। चीन की तरफ से कहा गया है कि वो चाहता था कि भारत के समर्थन में आमराय बनाने के लिए और बातें होनी चाहिए थी।
दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्र अमेरिका के भारत को समर्थन को देखते हुए चीन अपने रुख में नरमी लाया है। हालांकि चीन एनएसजी में भारत की भागीदारी का कट्टर विरोधी है। चीन की शह पर पाकिस्तान भी भारत का खुल्लम-खुल्ला विरोध कर रहा है। राजनयिकों की मानें तो ग्रुप में शामिल 48 देशों में न्यूजीलैंड, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रिया भी भारत की सदस्यता नहीं चाहते हैं।
भले ही अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते चीन ने एसएसजी में भारत के संबंध में चुप्पी तोड़ी हो, लेकिन जानकार यही मानते हैं कि इस बार भारत को ग्रुप की सदस्यता मिलना लगभग तय है।
हालांकि साल 2008 में अमेरिका से हुए परमाणु करार के बाद भारत को पहले से परमाणु प्रसार में काफी छूट मिलती रही हैं। यही नहीं भारत ने अप्रसार संधि पर अब दस्तखत नहीं किए हैं, बावजूद इसके भारत परमाणु हथियार बनाता रहा है।