10,000 फुट नीचे समंदर के सीने में चीन बनाएगा सैन्य अड्डा
- फोटो : file photo by mirror
भारत-अमेरिका समेत दुनिया भर के लिए लगातार खतरनाक हो रहा ड्रैगन दक्षिण चीन सागर में दस हजार फुट नीचे खुफिया सैन्य अड्डा बनाने जा रहा है। लगातार सैन्य ताकत में इजाफा कर रहे चीन के बेहद खौफनाक इरादे इस प्रोजेक्ट से पता चलते हैं।
अब तक जेम्स बॉण्ड की फिल्मों में ऐसे काल्पनिक ठिकाने दिखते थे। लेकिन चीन ऐसे ठिकानों को हकीकत का जामा पहनाने जा रहा है। मिरर की खबर के मुताबिक, दक्षिण चीन सागर की गहराई में दबे खजाने को निकालने के लिए चीन ने कमर कसी थी, लेकिन अब उसके इरादे इससे भी आगे जा पहुंचे हैं।
चीन की प्राथमिकता में है प्रोजेक्ट, लेकिन अड्डा बनाने को लेकर ड्रैगन आशंकित
अरबों के खर्च से बनेगा सैन्य अड्डा
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हालांकि, चीन को इस बात का डर भी है कि समंदर के बीचों बीच खुफिया सैन्य ठिकाना समंदर के थपेड़े झेल भी पाएगा या नहीं?
समंदर में सैन्य ठिकाना बनाने के इस प्रोजेक्ट पर मार्च 2016 में बात हुई थी। दरअसल, चीन ने 100 विज्ञान और प्रोद्योगिकी परियोजनाओं को अमल में लाने की बात कही थी, उस वक्त समंदर की गहराई में सैन्य अड्डा दूसरे नंबर पर था। लेकिन अब यह ड्रैगन की प्राथमिकता पर है। ये 100 प्रोजेक्ट चीन की पंचवर्षीय योजना में शामिल हैं।
चीन का विज्ञान मंत्रालय इन महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को गति देने जा रहा है। प्रोजेक्ट के खर्च के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन इतना जरूर है कि प्रोजेक्ट में अरबों का खर्च आएगा।
वॉशिंगटन स्ट्रेटजिक और बजेटरी असेसमेंट की जिम्मेदारी संभालने वाले ब्रायन क्लार्क ने बताया कि इस तरह का सैन्य ठिकाना अब तक नहीं बना है, लेकिन इसे बनाना निश्चित तौर पर संभव है।
आदमी वाली पनडुब्बियां पचास वर्षों से उस गहराई में जा रही हैं। चुनौती इस बात की है कि बिना रुके महीनों तक अनवरत काम करना होगा।
चीनी राष्ट्रपति ने दो महीने पहले दे दिए थे संकेत
चीन के इस प्रोजेक्ट से अमेरिका को एतराज
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चीन के राष्ट्रपति ने बीते महीने साइंस कॉन्फ्रेंस में इस बात के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि समंदर की गहराई में काफी खजाना है। उस खजाने की खातिर हमें अपनी तकनीकी पर और काम करना होगा। हमें समंदर की गहराई से वो खजाना निकलाना होगा।
पूरे दक्षिण चीन सागर में चीन अपना अधिकार थोपता है, जबकि ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, ताईवान और वियतनाम भी दक्षिण चीन सागर में अपनी हिस्सेदारी जता चुके हैं। समंदर के इस हिस्से से जहाजों के जरिए अरबों डॉलर का व्यापार हर साल होता है।
दक्षिण चीन सागर में चीन के मंसूबों पर अमेरिका एतराज जता चुका है, वह लगातार तीन की गतिविधियों पर निगरानी रखता है।
जापान और चीन के बीच भी समंदर के इस इलाके को लेकर अधिकार जताने के दावे किए जाते हैं। जाहिर है चीन के मंसूबे और दक्षिण चीन सागर में उसकी गतिविधियां सैन्य संघर्ष की चुनौतियों से भरी दिख रही हैं।