चीन के शेयर बाजारों और मुद्रा के भाव में उठापटक ने एक बार फिर दुनिया के निवेशकों में घबराहट पैदा कर दी है। इससे खुद को देश की अर्थव्यवस्था का मास्टर समझने वाले राष्ट्रपति शी जिनपिंग की चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। अर्थव्यवस्था, बाजार और मुद्रा का प्रबंधन करने की उनकी तमाम कोशिश पर प्रतिकूल अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य ने पानी फेर दिया है।
इस सप्ताह चीन की सरकार ने मुद्रा का अवमूल्यन और शेयर बाजार से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, लेकिन ये कदम भी शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में नाकाफी साबित हुए। इतना ही नहीं राष्ट्रपति के सामने दिक्कत यह भी है कि वह भारी कर्ज के बोझ में दबी सरकारी कंपनियों को और कर्ज लेने से रोकने और उन्हें बंद करने जैसे कदम भी नहीं उठा सकते।
ऐसा करने पर भारी संख्या में लोगों की छंटनी करनी पड़ सकती है और कर्ज लेकर खर्च करने की चीन वासियों की प्रवृति को भी प्रभावित असर पड़ सकता है। उनके पास पूर्व की तुलना में वर्तमान में विकल्प भी सीमित हैं।