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पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात से बौखलाया चीन, कहा- याद रखें 1962 की जंग

Fri, 30 Jun 2017 09:44 AM IST
amarujala.com, Presented By : अभिषेक मिश्रा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों की अमेरिकी यात्रा हैं। वहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी गर्मजोशी से उनका स्वागत किया, लेकिन, अमेरिका और भारत के बीच मजबूत होते संबंध से चीन को परेशानी हो रही है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात पर बीजिंग ने एक बार फिर भारत को धमकी भरे स्वर में चेताया है। 
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चीनी मीडिया ने भारत को 1960 के दशक का उदाहरण दिया है। वहां के अखबार हॉकिश ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, '1950 के अंत से 1960 की शुरुआत तक, सोवियत संघ और अमेरिका दोनों ने चीन के खिलाफ 'भारत कार्ड' खेलने का प्रयास किया। उस वक्त सरकार ने भारत की नीतियों का समर्थन किया था, लेकिन परिणाम वैसे नहीं आए जैसी उम्मीद थी।' लेख में 1962 में चीन और भारत के बीच हुए युद्ध में भारत की हार का जिक्र भी किया गया है। 

साथ ही लिखा है कि इतिहास गवाह है, कि भारत, चीन का सामना नहीं कर सकता है। चीन की नीतियों पर अपनी चिंताओं के बजाय भारत को हमारे साथ संबंध मजबूत करने चाहिए, यह उसकी सुरक्षा और विकास दोनों के लिए आवश्यक है। अखबार ने यह भी लिखा कि अमेरिका, भारत का इस्तेमाल चीन के खिलाफ एक हथियार के रूप में कर रहा है।
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भारत के चलते बाधित हो सकता CPEC का निर्माण

चीनी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के विरोध के चलते चाइना और पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि  बीजिंग और इस्लामाबाद को साथ काम करते हुए उन्हें नई दिल्ली की शंकाएं दूर करना चाहिए। 

भारत, पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरने वाले चीनी कॉरिडोर का लंबे समय से विरोध कर रहा है। चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे लेख में बताया गया है कि लोग समझते हैं, भारत का विरोध चीन के सीपीईसी के विकास में बाधा है। जबकि भारत इसका विरोध केवल इसलिए करता है क्योंकि यह पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है। 

उल्लेखनीय है कि चीन ने सीपीईसी में 51 प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट किया है, जिसमें से 19 प्रोजेक्ट लगभग तैयार हैं। पाकिस्तान ने घोषणा की है कि प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 50 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। यह वर्तमान में चल रहे प्रोजेक्ट की लागत है, अंतिम लागत इससे कहीं ज्यादा है।

बता दें कि ये प्रोजेक्ट चीन के लिए फायदे का बेहतरीन सौदा है, तो पाकिस्तान के लिए आने वाले समय में मुश्किलें खड़ी करने वाला सौदा। दरअसल इस प्रोजेक्ट में अभी चीन पूरा धन लगा रहा है, पर पाकिस्तान से उस धन पर 17% की दर से ब्याज वसूल रहा है। ऐसे में आने वाले समय में भारी-भरकम व्याज के बोझ तले पाकिस्तान को काफी परेशानियों को सामना करना पड़ सकता है।
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