भारत पर नेपाल की निर्भरता को कम करने के लिए चीन ने रणनीतिक कदम उठाया है। उसने नेपाल को रोजमर्रा की वस्तुओं की आपूर्ति करने को तिब्बत की बीहड़ पर्वत श्रेणियों के रास्ते काठमांडू के लिए संयुक्त सड़क एवं रेल के नए मार्ग खोल दिए हैं। इस सेवा के शुरू होने से चीन की ओर से नेपाल को वस्तुओं की आपूर्ति में तेजी आएगी और आवागमन में कम समय लगेगा। चीन का यह कदम भारत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
चीन के सरकारी अखबार पीपुल्स डेली के मुताबिक बुधवार को चीन के पश्चिमोत्तर गांसू प्रांत की राजधानी लांझोउ से एक 43 कोच वाली इंटरनेशनल मालगाड़ी तिब्बत के लिए रवाना हो गई। इस मालगाड़ी के 83 कार्गो कंटेनर में रोजमर्रा की जरूरी चीजें और घरेलू सामान लदा हुआ है। यह मालगाड़ी नेपाल के सबसे नजदीक तिब्बती नगर शिगेज तक कार्गो कंटेनर को पहुंचाएगी।
इसके बाद इन वस्तुओं को सड़क मार्ग से नेपाल के जीलोंग पोर्ट पहुंचाया जाएगा। इस बीच 2,431 किमी रेल और 564 किमी सड़क मार्ग की दूरी तय करने में कुल 10 दिन का समय लगेगा। इससे यात्रा में लगने वाला एक महीने से ज्यादा का समय बचेगा। इसके बाद वस्तुओं को जीलोंग पोर्ट से सड़क रास्ते से 160 किमी दूर नेपाल की राजधानी काठमांडू ले जाया जाएगा।
पीपुल्स डेली का कहना है कि संयुक्त रेल-सड़क सेवा शुरू होने से चीन के गांसू, किंघाई और तिब्बत इलाके में औद्योगीकरण को तेजी से बढ़ावा मिलेगा। मार्च में नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के चीन दौरे के बाद यह संयुक्त रेल-सड़क सेवा शुरू हुई है। ओली के दौरे के समय दोनों देशों ने तिब्बत के रास्ते वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।