2010 के बाद चीन के दौरे पर जाएंगे राष्ट्रपति
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी चीन के चार दिन के दौरे पर जाएंगे 24 मई को शुरू हो वाले इस दौरे पर राष्ट्रपति मुखर्जी चीन के राष्ट्रपति शी जिंपिंग और वहां के शीर्ष पोलित ब्यूरो के तीन नेताओं से भी मिलेंगे। राष्ट्रपति के इस दौरे में व्यापार और द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने पर खास जोर रहेगा।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी साउथ चाइना के औद्योगिक शहर गुआंगजू में उतरेंगे इस घनी आबादी वाले शहर का भारत से पुराना रिश्ता है। माना जाता है कि भारत से 6 शताब्दी में बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए बौद्धिधर्मा इसी शहर में आए थे। इस शहर में पहुंचने के कुछ ही देर बाद प्रणब मुखर्जी संबोधित भी करेंगे।
राष्ट्रपति मुखर्जी कंफेड्रेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज और चाइना काउंसिल फॉर दा प्रोमोशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड द्वारा आयोजित एक उच्च-स्तरीय बिजनेस इवेंट में हिस्सा लेंगे। गुआंगजू, चीन का शांघाई और बीजिंग के सबसे बड़ी जीडीपी वाला शहर है।
भारतीय राष्ट्रपति के तौर पर पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 2010 में चीन का दौरा किया था। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के इस दौरे से चीन और भारत के व्ययापारिक रिश्तों में मजबूती आने के उम्मीद की जा रही है। राष्ट्रपति के दौरे को प्रतीकात्मक रूप में देखा जा रहा है। प्रणब मुखर्जी के दौरे से गुआंगजू में रहने वाले भारतीय बहुत खुश हैं। राष्ट्रपति यहां चीन के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के छात्रों को भी संबोधित करेंगे।
उम्मीद की जा रही है कि राष्ट्रपति मुखर्जी चीन के राष्ट्रपति के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी की ताकतवर स्टैंडिंग कमेटी के सात सदस्यों की पोलित ब्यूरो के तीन सदस्यों से भी मिलेंगे। भारत के चीन से कूटनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भी यह दौरा दोनों देशों की ओर से संबंधों को सामान्य रखने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।