अब चीन की सरकार ने अपने देश में कानून का राज लागू करने की योजना बनाई है। इस योजना का एक पंचवर्षीय खाका तैयार किया गया है। सरकार ने कहा है कि उसका मकसद 2035 तक चीन को ऐसा देश बना देना है, जो कानून के राज के सिद्धांत से चलेगा। इसके लिए जो खाका तैयार किया गया है, उसका नाम- ‘कानून आधारित शासन पर अमल की रूपरेखाः 2021-2025’ रखा गया है। इसी हफ्ते सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी ने ये रूपरेखा जारी की।
इसके पहले पिछले दिसंबर में चीन ने इससे मिलते-जुलते दो दस्तावेज जारी किए थे। सेंट्रल कमेटी के प्रवक्ता ने कहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कानून का शासन लागू करने के लिए समन्वित नजरिया अपना रहे हैं। प्रवक्ता ने कहा- ‘शी जिनपिंग की कानून के राज संबंधी सोच को लागू करने के लिए तैयार किया गया दस्तावेज कम्युनिस्ट पार्टी का एक महत्वपूर्ण संकल्प है।’
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि जिनपिंग ने 2017 में हुई कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस (महाधिवेशन) में कानून के राज संबंधी अपनी सोच की चर्चा की थी। तभी उन्होंने कहा था कि 2025 तक इसे हासिल कर लेने का लक्ष्य तय किया जाना चाहिए। कम्युनिस्ट पार्टी ने उसी समय तक चीन के समाजवादी आधुनिकीकरण का लक्ष्य पूरा करने का एलान किया हुआ है। नई रूपरेखा में सरकारी कामकाज, सार्वजनिक सेवाओं, और कानून पर अमल में पारदर्शिता और कुशलता लाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की बात कही गई है।
चीन की वुहान यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर चिन चियाहोंग ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि नया दस्तावेज देश में कानून आधारित शासन लाने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी और सरकार की इच्छाशक्ति का प्रमाण है। उन्होंने कहा- ‘अगर पिछली पंचवर्षीय से तुलना करें, तो अपने मकसद के बारे में नया दस्तावेज अधिक वैज्ञानिक और व्यावहारिक है। इसमें समयबद्ध अमल की बात कही गई है।’
दस्तावेज में कहा गया है कि अब सभी सरकारी विभागों को अपने काम तय नियमों और विनियमों के अनुरूप करने होंगे। सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी और शक्ति को साफ-साफ संहिताबद्ध और सार्वजनिक करना होगा। इसमें कहा गया है कि सरकारी सूचना और सार्वजनिक सेवाओं के बारे में प्रावधानों की जानकारी जनता को देने के लिए मोबाइल ऐप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वेब आधारित संचार का उपयोग किया जाएगा।
पश्चिम दुनिया से अलग रही है चीन की समझ
सिटी यूनिवर्सिटी हांगकांग में सेंटर फॉर चाइनीज एंड कॉम्परेटिव लॉ के निदेशक वांग जियांयू ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि चीन में कानून के राज की समझ पश्चिमी दुनिया से अलग रही है। चीन में सख्त राजनीतिक प्रतिबंधों का चलन रहा है। उन्होंने कहा- ‘शी जिनपिंग राजनीतिक सीमाओं के भीतर वैसे व्यावहारिक और स्पष्ट नियम तय कर रहे हैं, जिनका पालन सबको करना होगा।’ वांग ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद जिनपिंग ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, लेकिन साथ ही उन्होंने शासन के नियम और विनियम भी तय किए हैं। ताजा पहल भी उसी दिशा में है।
गौरतलब है कि कम्युनिस्ट शासन में कानून को सबसे ऊपर नहीं माना जाता रहा है। बल्कि उसमें कम्युनिस्ट पार्टी की सर्वोच्चता रही है। जानकारों का कहना है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की ताजा पहल सही दिशा में है, लेकिन उससे पश्चिमी समझ के मुताबिक कानून का राज कायम होगा, इसकी संभावना नहीं है।