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China: शी जिनपिंग के लिए इस तरह पलक-पांवड़े क्यों बिछा दिए सऊदी अरब ने? जानें पूरा मामला

Sat, 10 Dec 2022 05:45 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेद्दाह

सार

अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में सीनियर फेलॉ और संयुक्त अरब अमीरात के विश्लेषक अब्दुल खालिक अब्दुल्ला ने कहा कि इस घटनाक्रम का पहला संदेश यह है कि अब हमारे सामने एक नया सऊदी अरब है। एक नई खाड़ी है। यह एक नई हकीकत है। हकीकत यह है कि चीन का एशिया में उदय हो रहा है। अमेरिका चाहे या ना चाहे, हम चीन से संबंध बनाएंगे।
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शी जिनपिंग - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सऊदी अरब यात्रा पर आए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का उस दर्जे का स्वागत हुआ है, जैसा पहले सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति का यहां होता था। शी जिनपिंग के लिए यहां बैंगनी कालीन बिछाई गई। सऊदी परंपरा में इस रंग का खास महत्त्व होता है। इसके अलावा उन्हें सबसे ऊंचे स्तर की सलामी दी गई। 

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सऊदी यात्रा के दौरान शी जिनपिंग के दो खास सम्मेलनों में भाग लेने का कार्यक्रम रखा गया। इनमें एक सम्मेलन अरब देशों के नेताओं के साथ था। दूसरा सम्मेलन खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों के नेताओं के साथ था। इसके बाद सऊदी अरब के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता रखी गई। समझा जाता है कि इस यात्रा के दौरान चीन और अरब देशों के बीच अरबों डॉलर के कारोबार के समझौते हो रहे हैं। 

विश्लेषकों के मुताबिक सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने चीन के साथ संबंध बनाने को अपनी खास प्राथमिकता बनाई है। माना जाता है कि प्रिंस सलमान के हाथ में ही सऊदी अरब की असल सत्ता है। अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि इस यात्रा के दौरान प्रिंस सलमान यह साफ संदेश ना चाहते हैं कि सऊदी अरब और चीन के बीच एक विशेष दोस्ती कायम हो गई है। 
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अमेरिकी टीकाकारों ने शी के हुए स्वागत की तुलना 2017 में जेद्दाह में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हुए स्वागत से की है। जबकि इस वर्ष राष्ट्रपति जो बाइडेन जब यहां आए, तो सऊदी प्रतिक्रिया मद्धम रही। टीकाकारों ने ये बात याद दिलाई है कि जब प्रिंस सलमान ने राष्ट्रपति बाइडेन से हाथ मिलाया, तब उनके चेहरे पर मुस्कान नहीं थी। इसके अलावा प्रिंस सलमान ने कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने की जो बाइडेन की अपील भी ठुकरा दी। उलटे उसके कुछ महीने बाद तेल उत्पाद देशों के संगठन ओपेक ने उत्पादन घटाने का फैसला कर लिया। इस निर्णय के पीछे भी प्रिंस सलमान का ही हाथ माना गया था। अब सलमान ने शी जिनपिंग के स्वागत में  अपनी पूरी ताकत लगा दी है। 

अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में सीनियर फेलॉ और संयुक्त अरब अमीरात के विश्लेषक अब्दुल खालिक अब्दुल्ला ने कहा कि इस घटनाक्रम का पहला संदेश यह है कि अब हमारे सामने एक नया सऊदी अरब है। एक नई खाड़ी है। यह एक नई हकीकत है। हकीकत यह है कि चीन का एशिया में उदय हो रहा है। अमेरिका चाहे या ना चाहे, हम चीन से संबंध बनाएंगे।

पश्चिम एशिया के विश्लेषकों की शिकायत है कि अमेरिका ने पहले इस इलाके को उसकी किस्मत के भरोसे छोड़ दिया। जब उसे तेल की जरूरत पड़ी, तब उसे इस क्षेत्र की याद आई। अब्दुल्ला ने कहा कि अगर अमेरिका हमसे बेहतर रिश्ते रखना चाहता है, तो उसके लिए उसे अधिक प्रतिबद्धता दिखानी होगी। अगर वह ऐसा नहीं करता है, तो हम धीरे-धीरे अलग होते जाएंगे। इस बारे में फैसला अमेरिका को करना है।’

इस बीच चीन ने अपने इफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्स को आगे बढ़ाते हुए सऊदी अरब और आसपास के ज्यादातर देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं। इसके अलावा वह तेल उत्पादक देशों के एक बड़े बाजार के रूप में उभरा है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इस तरह दोनों पक्षों के हित एक दूसरे से जुड़ रहे हैँ। शी के प्रति जेद्दाह में दिख रही गर्मजोशी इसी घटनाक्रम की झलक है। 

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