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परमाणु मुद्दे पर बने नए हालात: उत्तर कोरिया के पक्ष में खुल कर खड़ा हुआ चीन

Sat, 02 Oct 2021 05:50 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग

सार

विश्लेषकों का कहना है कि चीन के इस बयान से उत्तर कोरिया का मनोबल बढ़ेगा। चीन ने ये साफ संकेत दे दिया है कि वह परमाणु निरस्त्रीकरण के मुद्दे पर अब संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के साथ खड़ा नहीं है। इससे दक्षिण कोरिया की ये उम्मीद भी कमजोर पड़ेगी कि कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए चीन सक्रिय भूमिका निभाएगा...
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चीन और उत्तर कोरिया - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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परमाणु मुद्दे पर अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच वार्ता में जारी गतिरोध के बीच चीन अब खुल कर उत्तर कोरिया के पक्ष में खड़ा हो गया है। उसने उत्तर कोरिया की इस मांग का समर्थन किया है कि परमाणु मुद्दे पर वार्ता दोबारा शुरू करने के लिए जरूरी है कि अमेरिका पहले उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे। चीन के इस ताजा रुख से कोरिया प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की जारी कोशिशों में एक नया पहलू जुड़ गया है।

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गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने छह महीनों के विराम के बाद पिछले महीने परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलों का परीक्षण फिर से शुरू कर दिया। 12 सितंबर को उसने ऐसी क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया। उसके कुछ दिन बाद उसने दो बैलिस्टिक मिसाइलों को छोड़ा। ये परीक्षण उसने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए किए। चीन इस मामले में अब तक सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करता रहा है। लेकिन अब चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा है कि उत्तर कोरिया की चिंताएं ‘वाजिब और तर्कपूर्ण’ हैं, जिन्हें दूर किया जाना चाहिए।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक यह चीन की नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे अमेरिका के प्रति चीन के सख्त हो रहे रुख का संकेत मिलता है। हुआ ने कहा- ‘अमेरिका को सिर्फ खोखली नारेबाजी के बतौर बातचीत की मांग नहीं करनी चाहिए। बल्कि उसे गंभीरता दिखानी चाहिए और यथार्थवादी प्रस्ताव के साथ सामने आना चाहिए।’
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विश्लेषकों का कहना है कि चीन के इस बयान से उत्तर कोरिया का मनोबल बढ़ेगा। चीन ने ये साफ संकेत दे दिया है कि वह परमाणु निरस्त्रीकरण के मुद्दे पर अब संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के साथ खड़ा नहीं है। इससे दक्षिण कोरिया की ये उम्मीद भी कमजोर पड़ेगी कि कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए चीन सक्रिय भूमिका निभाएगा। इसके विपरीत अब चीन और उत्तर कोरिया के बीच रिश्ते और गहराने के संकेत हैँ।

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इसी हफ्ते चीन के राष्ट्रीय दिवस पर भेजे अपने संदेश में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से अपील की कि वह ‘चीन विरोधी विवेकहीन ताकतों को कुचल दे।’ किम ने कहा कि ऐसी ताकतों को कुचलने के मुद्दे पर उत्तर कोरिया चीन का पूरा समर्थन करेगा। किम ने यह भी कहा कि चीन कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में चीन ने जो सफलताएं हासिल की हैं, उत्तर कोरिया उसे अपनी कामयाबी मानता है।

विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका को इस क्षेत्र में बन रही इस धुरी का अंदाजा है। अमेरिका के लिए खतरों का जायजा लेते हुए अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक ताजा रिपोर्ट में चीन, उत्तर कोरिया, रूस और ईरान को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मुख्य खतरा बताया गया है। विश्लेषकों ने कहा है कि 1953 में कोरिया युद्ध खत्म होने के बाद से चीन इस क्षेत्र के बारे में सावधानी से नीति तय करता रहा है। इसीलिए उसने दक्षिण कोरिया से भी संबंध कायम रखे हैं।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाये-इन लगातार इस क्षेत्र को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की मांग कर रहे हैं। उत्तर कोरिया के ताजा मिसाइल परीक्षण से सिर्फ एक दिन बाद कोरियाई प्रायद्वीप के लिए चीन के विशेष प्रतिनिधि लिउ शियाओमिंग ने दक्षिण कोरिया के मुख्य वार्ताकार नोह क्यूक-दुक से बातचीत की थी। लेकिन अब ऐसा लगता है कि चीन ने मामले में उत्तर कोरिया के साथ खड़े होने का फैसला कर लिया है।
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