चीन ने ताइवान की सीमा में अपने 38 सैन्य विमानों को भेजा।
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चीन ने 1 अक्टूबर को अपना राष्ट्रीय दिवस मनाते हुए एक बार फिर से उकसावे की कार्रवाई को अंजाम दिया। उसने ताईवान को धमकाने के लिए अपने 38 लड़ाकू विमानों को ताइवान के वायु क्षेत्र में भेजा। ताइवान ने इसे अपनी हवाई सीमा का अब तक का सबसे बड़ा उल्लंघन बताया है। पिछले एक सालों में चीन ने कई बार इस उकसावे की कार्रवाई को अंजाम दिया है। पिछले हफ्ते भी चीन की ओर से 24 विमान ताइवान की सीमा में भेजे गए थे।
अब तक का सबसे बड़ा उल्लंघन
इस घटना की जानकारी ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने दी और बताया कि चीन ने एक ही दिन में दो बार अपने जे-16, सुखोई-30 लड़ाकू विमान, परमाणु क्षमता वाले एच-6 बॉम्बर और एंटी सबमरीन विमानों को ताइवान की सीमा में भेजा था। इन विमानो ने पहले ताइवान के प्रतास द्वीप और फिर बाशी चैनल (यह ताइवान और फिलीपींस को अलग करता है) के ऊपर उड़ान भरी। इस सीमा उल्लंघन ने बीते जून में 28 विमानों द्वारा किए गए सबसे बड़े सीमा उल्लंघन के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। ताइवान ने भी तत्काल ही चेतावनी देने के लिए अपने लड़ाकू विमानो को भेज दिया।
ग्लोबल टाईम्स ने बताया सामान्य घटना
इस उल्लंघन को लेकर चीन की सरकार ने अब तक कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, चीन की सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाईम्स ने इसको लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी और इसे एक सामान्य सैन्य अभ्यास बताया। उसने इसे चीन की संप्रभुता की रक्षा के लिए आवश्यक बताया। चीन ने इन दिनों स्वशासित ताइवान के आसपास सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया है। ताइवान खुद को एक आजाद देश जबकि चीन इसे अपना क्षेत्र मानता है और बार-बार इसे चीन में विलय करने की धमकी देता है।
इसलिए है चीन और ताइवान में तनातनी
1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने शियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था। जिसके बाद काई शेक ने ताइवान द्वीप पर जाकर अपनी सरकार का गठन किया। उस समय कम्युनिस्ट पार्टी के पास मजबूत नौसेना नहीं थी। इसलिए उन्होंने समुद्र पार कर इस द्वीप पर अधिकार नहीं किया। तब से ताइवान खुद को रिपब्लिक ऑफ चाइना मानता है। लेकिन चीन इस द्वीप को अपना अभिन्न अंग मानता है।