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ड्रैगन का ढकोसला: लोकतंत्र के सवाल पर अमेरिका के खिलाफ चीन के आक्रामक रुख में कितना दम?

Mon, 06 Dec 2021 07:57 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

चीन ने दावा किया है कि अपनी समग्र प्रक्रिया लोकतंत्र के जरिए ही उसने करोड़ों लोगों को गरीबी से उबारा। यह मानवाधिकारों के प्रति उसकी निष्ठा का प्रमाण है। चीन ने दलील दी है कि लोकतंत्र एक आम उसूल है, जिसके कई रूप दुनिया में मौजूद हैं। उसने कहा है कि सभी देश अमेरिकी प्रकार वाले लोकतंत्र से ही चलें, यह जरूरी नहीं है...
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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग। - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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चीन लोकतंत्र के मुद्दे पर अमेरिका के खिलाफ ‘वैचारिक युद्ध’ में लगातार आक्रामक रुख अपना रहा है। शनिवार और रविवार को इस मामले में चीन ने दो दस्तावेज जारी किए। उसके बाद बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक भाषण में ‘बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था’ को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लोकतांत्रिक रूप देने की वकालत की।

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अपने भाषण में शी ने वैश्विक मामलों में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि विश्व संचालन की व्यवस्था में ऐसे सुधार होने चाहिए, जिससे विकासशील देशों की आवाज को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने कहा कि वैश्विक मामलों का संचालन सभी पक्षों के आपसी विचार-विमर्श से होना चाहिए।

अमेरिकी शिखर सम्मेलन से पहले भाषण

पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि शी ने ये भाषण उस समय दिया, जब चीन अपनी शासन प्रणाली के गुण दुनिया को बताने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की तरफ से आयोजित ‘लोकतांत्रिक देशों के शिखर सम्मेलन’ से ठीक पहले चीन ने इस बारे में अपनी मुहिम तेज कर दी है। ये शिखर सम्मेलन नौ और दस दिसंबर को वर्चुअल माध्यम से होगा। अमेरिका ने कहा है कि इस शिखर सम्मेलन का मकसद तानाशाही व्यवस्थाओं का मुकाबला करना और मानवाधिकारों को बढ़ावा देना है।

अमेरिका ने इस शिखर सम्मेलन लगभग 110 देशों को आमंत्रित किया है, जिनमें ताइवान भी है। जबकि चीन ताइवान को अपना प्रदेश समझता है। अमेरिका ने ये सम्मेलन उस समय आयोजित किया है, जब शिनजियांग प्रांत और हांगकांग में मानवाधिकारों के कथित हनन के आरोप में चीन पर दबाव बढ़ता गया है। साथ ही कई हलकों से चीन के अंदर सेंसरशिप बढ़ने की शिकायत भी की गई है।

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इस अमेरिकी मुहिम के खिलाफ चीन ने शनिवार को एक दस्तावेज जारी किया, जिसमें उसने अपनी शासन प्रणाली को बेहतर लोकतंत्र बताया। उसने इसे ‘समग्र प्रक्रिया लोकतंत्र’ कहा है। रविवार को उसने एक और विस्तृत दस्तावेज जारी किया, जिसमें चीन ने अमेरिकी लोकतंत्र की खामियों का उल्लेख किया है। इस दस्तावेज में चीन ने कहा है कि अमेरिका को पहले अपनी व्यवस्था की खामियों को दूर करना चाहिए, फिर उसे दूसरे देशों को लोकतंत्र की सीख देनी चाहिए।

अमेरिकी लोकतंत्र को नकारा!

चीन ने दावा किया है कि अपनी समग्र प्रक्रिया लोकतंत्र के जरिए ही उसने करोड़ों लोगों को गरीबी से उबारा। यह मानवाधिकारों के प्रति उसकी निष्ठा का प्रमाण है। चीन ने दलील दी है कि लोकतंत्र एक आम उसूल है, जिसके कई रूप दुनिया में मौजूद हैं। उसने कहा है कि सभी देश अमेरिकी प्रकार वाले लोकतंत्र से ही चलें, यह जरूरी नहीं है।

रविवार को दिए अपने भाषण में शी जिनपिंग ने भी कहा कि लोकतंत्र पूरे मानवता का उसूल है, जिसे दुनिया भर में शांति, विकास, न्याय, समता और स्वतंत्रता के साथ प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

अमेरिकी लोकतंत्र के बारे में जारी दस्तावेज में चीन ने आरोप लगाया है कि इसकी वजह से अमेरिका अफरातफरी में फंसा हुआ है, जिसकी मिसाल इस साल जनवरी में वहां संसद भवन पर हुए हमले में देखने को मिली थी। साथ ही अमेरिका में नस्लभेद गहरे बैठा हुआ है। लेकिन पर्यवेक्षकों ने कहा है कि चीन ने अमेरिका की तरफ से आयोजित शिखर सम्मेलन से पहले ही आक्रामक रुख अपना कर असल में अपना बचाव करने की कोशिश की है।

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