आतंकवादी संगठन आईएसआईएस-खुरासान से निपटने के तालिबान के इरादे और क्षमता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आलोचकों का कहना है कि तालिबान इस संगठन के खिलाफ सिर्फ दिखावटी कार्रवाई कर रहा है। ऐसा वह अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाने और विदेशी मदद की बहाली के मकसद से कर रहा है।
तालिबान ने पहले कहा था कि आईएसआईएस-के एक छोटा गुट है। लेकिन पिछले अगस्त में इस संगठन ने अपनी ताकत दिखाई, जब उसने काबुल हवाई अड्डे पर हमला कर दिया। उस हमले में 13 अमेरिकी सैनिकों समेत डेढ़ सौ से ज्यादा लोग मारे गए थे। खबरों के मुताबिक उसके बाद इस संगठन ने काबुल और कांधार प्रांत में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं।
वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि आईएसआईएस-के में शामिल होने वाले लड़ाकों की संख्या बढ़ी है। उधर इस संगठन के खिलाफ कार्रवाई का इरादा जताने के लिए तालिबान नेतृत्व की देश में आलोचना बढ़ रही है। उस पर आरोप लगा है कि अमेरिका के दबाव में आकर वह सहमना इस्लामी संगठन पर कार्रवाई के लिए तैयार हो गया है।
बताया जाता है कि जब अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में थी, तब आईएसआईएस-के मोटे तौर पर देश के उत्तरी इलाकों में सिमटा हुआ था। तब माना जाता था कि उसके पास दो से तीन हजार लड़ाके हैं। लेकिन अब उसके प्रभाव क्षेत्र और लड़ाकों की संख्या दोनों में बढ़ोतरी होने के संकेत हैं। कुछ रोज पहले तालिबान कमांडरों ने आरोप लगाया था कि कुछ विदेशी एजेंसियां और कुछ तालिबान विरोधी लड़ाकू गुट आईएसआईएस-के की मदद कर रहे हैं।
अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विदेश प्रतिनिधि डेबोराह लियोन्स ने हाल में कहा- ‘आईएसआईएस-के कभी कुछ प्रांतों और काबुल तक ही सीमित था। लेकिन अब यह लगभग हर प्रांत में मौजूद है और उसकी सक्रियता बढ़ रही है।’ पर्यवेक्षकों का कहना है कि आईएसआईएस-के की बढ़ती ताकत यही बताती है कि तालिबान या तो इस संगठन का पूरे मनोयोग से मुकाबला नहीं कर रहा है या फिर उसकी ऐसा करने की क्षमता ही नहीं है। दोनों ही बातें उसकी साख में सेंध लगाने वाली हैं।