चीन के गान्सू प्रांत की सरकार के हवाले से जर्मन वेबसाइट खबर दी है कि वुवेई स्थित प्लांट का निर्माण कार्य इस महीने के आरंभ में पूरा हो गया। परीक्षण के तौर पर उसका संचालन इसी महीने शुरू किया जाएगा। वेबसाइट एशिया टाइम्स पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक थोरियम सिल्वर कलर का रेडियो एक्टिव धातु है, जो चट्टानों के बीच पाया जाता है। अभी इसका औद्योगिक स्तर पर बहुत कम उपयोग होता है। चीन में खनिज पदार्थ रेयर अर्थ के खनन के दौरान बाइ प्रोडक्ट के रूप में थोरियम काफी मात्रा में प्राप्त हो रहा है। इसलिए चीन को फिलहाल इसका आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सिडनी स्थित ऑस्ट्रेलियन न्यूक्लीयर साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑर्गेनाइजेश में परमाणु इंजीनियर लिंडन एडवर्ड्स ने एशिया टाइम्स से कहा- ‘थोरियम का भंडार यूरेनियम की तुलना में अधिक मात्रा में उपलब्ध है। इसलिए थोरियम से बिजली बनाने की तकनीक अगले 50 से 100 सालों तक के लिए उपयोगी होगी। उसके बाद अनुमान है कि थोरियम का भंडार खत्म हो जाएगा।’
बीजिंग स्थित एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल डेवलपमेंट में ऊर्जा मॉडल निर्माता जियांग किजुन ने एशिया टाइम्स से कहा- ‘जो रिएक्टर तैयार हुआ है, वह साल 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने के चीन के उद्देश्य के लिहाज से बिल्कुल सटीक तकनीक है।’ विशेषज्ञों के मुताबिक परमाणु संयंत्र में बतौर ईंधन थोरियम का इस्तेमाल करने के बारे में परीक्षण अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन और भारत में भी चल रहा है। लेकिन ऐसा लगता है कि इस धातु संचालित परमाणु सयंत्र तैयार करने में फिलहाल चीन ने बाजी मार ली है।