China: चीन नहीं चाहता कि रूस यूक्रेन युद्ध में हारे, क्योंकि इसके बाद अमेरिका पूरा ध्यान बीजिंग पर लगा सकता है। ब्रसेल्स में ईयू नेताओं से बातचीत के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी के इस बयान ने अधिकारियों को चौंका दिया। रिपोर्ट के अनुसार, चीन को आशंका है कि युद्ध लंबा चला तो उसका रणनीतिक फायदा उसे मिल सकता है।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं से कहा कि बीजिंग नहीं चाहता कि रूस अपनी युद्ध लड़ाई में यूक्रेन से हार जाए, क्योंकि उसके बाद अमेरिका पूरी तरह से अपना फोकस चीन पर कर देगा। उनका यह बयान ब्रसेल्स के अधिकारियो के आश्चर्यचकित करने वाला था। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
विज्ञापन
हांगकांग आधारित 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में कहा, वांग का यह बयान ईयू की काजा काल्लास से बातचीत के दौरान सामने आया, जो पुष्टि करता है कि बीजिंग की स्थिति क्या है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने आज मीडिया से बातचीत में वांग के रूस-यूक्रेन युद्ध पर दिए गए बयान के बारे में सवाल का जवाब दिया और बीजिंग के इस संघर्ष पर अपने रुख को दोहराया। वांग इस समय ईयू के दौरे पर हैं। रिपोर्ट में कहा गया, ईयू के कुछ अधिकारी वांग के इस स्पष्ट बयान से हैरान थे।
हालांकि, वांग ने चीन पर रूस को आर्थिक या सैन्य रूप से समर्थन देने के आरोप को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि चीन ऐसा करता तो यह संघर्ष पहले ही खत्म हो चुका होता। चार घंटे चली गहन बातचीत के दौरान वांग ने काल्लास को कई 'इतिहास के सबक और उपदेश' दिए। एस्टोनियां की प्रधानमंत्री रह चुकीं काल्लास ईयू के विदेश मामलों की मंत्री हैं।
कुछ ईयू अधिकारियों का मानना है कि वांग उन्हें हकीकत पर आधारित राजनीति का पाठ पढ़ा रहे थे, जिसमें चीन का मानना है कि अमेरिका जल्द ही अपना पूरा फोकस पूर्व की ओर केंद्रित करेगा।
ब्रसेल्स में वांग यी के बयान को कुछ लोग इस तरह भी समझ रहे हैं कि चीन ने रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू करने को नहीं कहा था, लेकिन अगर यह युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो इससे चीन को फायदा हो सकता है। अगर अमेरिका यूक्रेन में ही उलझा रहता है, तो वो चीन पर ध्यान नहीं देगा। यानी अमेरिका का फोकस चीन से हटकर रूस पर बना रहेगा और इससे चीन को रणनीतिक रूप से फायदा होगा।