सीजेआई ने कहा कि भारत में अदालतें मध्यस्थता समर्थक हैं। भारतीय मध्यस्थता परिदृश्य का विकास वैश्विक रुझानों और मांगों के प्रति बहुत ही संवेदनशील रहा है। इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया कि मध्यस्थता प्रक्रिया में अदालत की भूमिका पर्यवेक्षी होनी चाहिए।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन वी रमना ने मंगलवार को कहा कि मध्यस्थता व्यावसायिक जगत के लिए सबसे उपयुक्त विवाद समाधान तंत्र है। लंदन में आयोजित भारत-यूके वाणिज्यिक विवादों में मध्यस्थता पर एक सम्मेलन के उद्घाटन भाषण के दौरान उन्होंने ये बात कही।
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सीजेआई ने कहा कि भारत में अदालतें मध्यस्थता समर्थक हैं। भारतीय मध्यस्थता परिदृश्य का विकास वैश्विक रुझानों और मांगों के प्रति बहुत ही संवेदनशील रहा है। इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया कि मध्यस्थता प्रक्रिया में अदालत की भूमिका पर्यवेक्षी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आत्मनिरीक्षण करने और मध्यस्थता को एक कुशल परिणाम-उन्मुख संस्थान बनाने के लिए सभी संभावनाओं को तलाशने और उसके साधन खोजने का समय है। एन वी रमना ने कहा कि हमें सहायता और हस्तक्षेप के बीच की बारीक रेखा को पार नहीं करना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने अदालतों में मामलों के निपटारे में देरी के मुद्दे पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि नियमित अदालतों के भीतर निर्णय लेने में लंबा समय लगता है और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भारत में मामलों की पेंडेंसी एक प्रमुख मुद्दा है।
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न्यायमूर्ति रमना ने कहा कि बढ़ते कार्यभार के अनुरूप बुनियादी ढांचे और पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों के अभाव में ये समस्या विकराल होती जा रही है। यही कारण है कि मैं भारत में न्यायिक बुनियादी ढांचे को बदलने और उन्नत करने के साथ-साथ न्यायिक रिक्तियों को भरने और अदालतों की ताकत बढ़ाने की जोरदार वकालत कर रहा हूं।
सीजेआई ने कहा कि अदालतों में मामलों की पेंडेंसी के बोझ को कम करने का एक और तरीका विवाद समाधान के अन्य साधनों, जैसे मध्यस्थता या मध्यस्थता को बढ़ावा देना और लोकप्रिय बनाना भी है।