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Pakistan Army: आखिर क्यों घबरा रहे हैं पाक सेना चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा, ये आरोप बने गले की फांस

Tue, 05 Jul 2022 07:34 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

सेना अध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने सेना और खुफिया एजेंसियों के टॉप कमांडरों को राजनीति से दूर रहने का आदेश दिया है। जनरल बाजवा ने कहा कि सेना को बदनामी से बचाने के लिए ऐसा अनुशासन बरतना जरूरी हो गया है...
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इमरान खान और कमर जावेद बाजवा - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पाकिस्तान में एस्टैबलिशमेंट (सेना और खुफिया तंत्र) लगातार बचाव की मुद्रा में है। पाकिस्तान बनने के बाद से ऐसे हालात कभी नहीं देखे गए। समझा जाता है कि इमरान खान के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद से आबादी के बहुत बड़े हिस्से में सेना और खुफिया तंत्र की भूमिका की जिस तरह सार्वजनिक आलोचना हो रही है, उससे एस्टैबलिशमेंट विचलित है।

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इस बात की ताजा मिसाल सोमवार को सामने आई, जब देश के खुफिया प्रमुख ने अपने सभी कमांडरों के लिए यह आदेश जारी किया कि वे किसी तरह की राजनीतिक गतिविधि में शामिल न हों और राजनेताओं से कोई संबंध न रखें। खुफिया प्रमुख ने कहा कि वे यह नीतिगत आदेश सेनाध्यक्ष के निर्देश के तहत जारी कर रहे हैं। आम धारणा रही है कि पाकिस्तान में राजनीति और नेताओं का सूत्रधार सेना नेतृत्व रहता है। लेकिन अब खुफिया सूत्रों ने अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया- ‘सभी खुफिया अधिकारियों से सख्ती से कहा गया है कि वे राजनीति से दूर रहें। वे किसी ऐसी गतिविधि में शामिल न हों।’

जनरल बाजवा ने दिया आदेश

खुफिया प्रमुख से कहा गया है कि इस आदेश के उल्लंघन के मामलों में प्रति कोई सहनशीलता नहीं बरती जाएगी। इस आदेश के एक ही दिन पहले पाकिस्तानी मीडिया में खबर आई थी कि सेना अध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने सेना और खुफिया एजेंसियों के टॉप कमांडरों को राजनीति से दूर रहने का आदेश दिया है। जनरल बाजवा ने कहा कि सेना को बदनामी से बचाने के लिए ऐसा अनुशासन बरतना जरूरी हो गया है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक सेना और खुफिया तंत्र को इस तरह बचाव की मुद्रा में पहुंचा देना इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के बढ़ते असर का संकेत है। पीटीआई ने अप्रैल में इमरान खान की सरकार गिरने के बाद से सुरक्षा एस्टैबलिशमेंट के खिलाफ तीखा अभियान चला रखा है। इमरान खान का आरोप है कि उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाने की पूरी कार्रवाई अमेरिका की देखरेख में हुई। जबकि पीटीआई का बड़ा हिस्सा इसके पीछे एस्टैबलिशमेंट का हाथ बताता रहा है।

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अप्रैल और मई में खान ने भी परोक्ष रूप से बार-बार एस्टैबलिशमेंट पर निशाना साधा था। उधर उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर सैन्य नेतृत्व विरोधी अभियान चलाया। उस दौरान कई बड़े सैनिक कमांडरों पर अंगुली उठाई गई। हाल में इमरान खान ने सेना के खिलाफ अपनी आवाज धीमी कर दी है। लेकिन पीटीआई के दूसरे नेताओं ने खुफिया एजेंसी आईएसआई की आलोचना जारी रखी है।

आईएसआई पर भी लगे आरोप

पार्टी की नेता यास्मीन राशिद ने हाल में आरोप लगाया था कि जल्द ही होने वाले उपचुनावों में आईएसआई सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज और उसके सहयोगी दलों की मदद कर रही है। पंजाब की प्रांतीय सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुकीं राशिद ने इस आरोप के पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं किया। लेकिन उन्होंने सेना और खुफिया तंत्र को संबोधित करते हुए कहा- ‘अगर आप तटस्थ होने का दावा करते हैं, तो बेहतर यह है कि आप असल में तटस्थ रहें।’

समझा जाता है कि ऐसे लांछनों से जनता की निगाहों में खराब हुई अपनी छवि से एस्टैबलिशमेंट परेशान है। छवि सुधारने के लिए उसने पहले कई सार्वजनिक बयान दिए। अब इस दिशा में एक ठोस कदम उठाने का संकेत दिया गया है।

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