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रिपोर्ट: भारत के पड़ोसी देशों में हिंदुओं की हालत बदतर, 25 साल बाद बांग्लादेश में नहीं बचेगा एक भी हिंदू, जानें बाकी देशों का हाल

Sun, 04 Apr 2021 09:36 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • रिपोर्ट में दावा, भारत के पड़ोसी देशों में हिंदुओं की स्थिति चिंताजनक
  • इंडोनेशिया और श्रीलंका में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ीं
  • मलेशिया में हिंदुओं की आबादी 6.4 फीसदी, लेकिन अधिकार न के बराबर 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Twitter
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विस्तार
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भारत के पड़ोसी देशों में हिंदुओं की स्थिति बदतर होती जा रही है। बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं का जीना हराम हो चुका है। हिंदू अपनी जान बचा सब छोड़छाड़ कर वहां से भाग रहे हैं। जिस हिसाब से उनका पलायन हो रहा है, ऐसा ही रहा तो 25 साल बाद बांग्लादेश में एक भी हिंदू नहीं बचेगा। सेंटर फॉर डेमोक्रेसी प्लूरलिज्म एंड ह्यूमन राइट्स (सीडीपीएचआर) की ताजा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

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सीडीपीएचआर ने भारत के सात पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और तिब्बत में मानवाधिकार को लेकर यह रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट शिक्षाविद, वकील, जज, मीडियाकर्मी और शोधकर्ताओं के एक समूह ने तैयार की है।

बांग्लादेश : प्रतिदिन 632 लोग कर रहे पलायन 
बांग्लादेश में भी मानवाधिकार और धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति भी बदतर हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अब्दुल बरकत की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 4 दशक में बांग्लादेश से 2.3 लाख से ज्यादा लोग हर साल पलायन करने के मजबूर हो रहे हैं, जिसका औसत 632 लोग प्रतिदिन है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर बांग्लादेश में इसी गति के साथ पलायन होता रहा, तो 25 साल बाद वहां कोई भी हिंदू नहीं रहेगा।
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पाकिस्तान: अल्पसंख्यकों ने उठाई आवाज, तो मार दिया गया

सीडीपीएचआर की रिपोर्ट में पाकिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है। पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ-साथ सिख और ईसाई अल्पसंख्यकों को भी चुनौतियां झेलनी पड़ती हैं। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों का रहना जंग लड़ने से कम नहीं है। वहां हिंदू, सिख और ईसाई धर्म की युवा महिलाओं के साथ अपहरण, दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन आदि घटनाएं लगातार हो रही हैं। इसके अल्पसंख्यक को डराया और धमकाया भी जाता है।

बता दें कि पाकिस्तान की आबादी 21 करोड़ है। विभाजन के समय मजहबी जनसांख्यिकी प्रतिशत को आधार बनाएं, तो हिंदू-सिखों की आबादी 3.5 करोड़ होनी थी। जो 50-60 लाख रह गई है। ज्यादातर हिंदू-सिखों ने या तो उत्पीड़न से त्रस्त होकर इस्लाम अपना लिया या पलायन कर लिया। जिसने विरोध में आवाज उठाई, उसे मार दिया गया।

अफगानिस्तान: विलुप्त होने की कगार पर हिंदू
अफगानिस्तान में हिंदू अब लुप्त होने के कगार पर हैं।अफगानिस्तान के संविधान के अनुसार, कोई मुस्लिम व्यक्ति ही देश का राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बन सकता है। 1970 की जनसंख्या के अनुसार, वहां सात लाख के करीब हिंदू और सिख थे, जो अब सिर्फ 200 हिंदू और सिख परिवार रह गए हैं। तिब्बत में भी कमोबेश यही स्थिति है। चीन ने खासे प्रतिबंध लगा रखे हैं। वह सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई  पहचान भी खत्म करने की कोशिश कर रहा है।  मलेशिया में हिंदुओं की आबादी 6.4 फीसदी है, लेकिन हिंदुओं को यहां मुस्लिमों के समान अधिकार नहीं है।
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इंडोनेशिया और श्रीलंका में निशाने पर हिंदू

इंडोनेशिया में पिछले कुछ सालों में धार्मिक कट्टरता बढ़ गई है और अब अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाने लगा है। हिंदू बड़ी संख्या में निशाने पर हैं। श्रीलंका में भी धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति चिंताजनक है।
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