सीडीसी के मुताबिक अब तक इस बारे में किसी पैटर्न की पहचान नहीं हो सकी है कि क्या किसी खास आबादी समूह के लोग ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन से अधिक पीड़ित होते हैं। क्या किसी खास कंपनी की वैक्सीन लेने वाले लोगों के ऐसे संक्रमण का शिकार होने की अधिक संभावना रहती है, इस बारे में भी कोई पैटर्न नहीं दिखा है।
इस बीच कनाडा में हुए एक अध्ययन से संकेत मिला है कि नवजात शिशुओं के कोरोना से संक्रमित होने के मामले बेहद कम हैं। इसके बावजूद वहां के विशेषज्ञों ने शिशु के जन्म के तुरंत बाद उसके और उसकी माता की कोविड जांच करने को जरूरी बताया है। ये अध्ययन जेएएमए नेटवर्क ऑपेन जर्नल में छपा है। इसके मुताबिक छह हजार से ज्यादा नवजात शिशुओं की जांच की गई। उनमें से सिर्फ 2.9 फीसदी को कोविड-19 से संक्रमित पाया गया। अध्ययनकर्ताओं ने दावा किया है कि नवजात शिशुओं पर कोविड-19 के प्रभाव का यह पहला अध्ययन है।
इस अध्ययन में तुरंत जन्मे से शिशु लेकर चार महीनों तक के शिशुओं की कोविड जांच की गई। पाया गया कि शिशुओं के कोविड संक्रमित होने की माध्यमिक (मेडियन) उम्र 108 दिन है। अध्ययन में सिर्फ 12 ऐसे बच्चे थे, जो जन्म के समय ही संक्रमित पाए गए।
अमेरिका में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने शुक्रवार को कहा था कि उसके विशेषज्ञ गर्भावस्था के दौरान कोविड-19 के असर का अध्ययन करने जा रहे हैँ। इस दौरान देखा जाएगा कि गर्भावस्था के दौरान संक्रमित हुई माताओं के भ्रूण पर उसका क्या असर होता है।