कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को एक बार फिर देश की संसद में विश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसमें भी जीत हासिल की। यह मुख्य प्रतिद्वंद्वी टोरी द्वारा उन्हें पद से हटाने का प्रयास था। ट्रूडो ने 207 में से 121 वोटों के साथ दोबारा चुनाव कराने के कंजर्वेटिव के इरादे पर पानी फेर दिया। इस दौरान संसद में दो छोटे गुट ट्रूडो की अल्पमत सरकार के पक्ष में दिखे। बता दें कि प्रस्ताव में ट्रूडो सरकार पर आवास संकट, रहने की लागत और बढ़ते अपराध को कम करने में असफल रहने और कनाडाई इतिहास में सबसे अधिक केंद्रीकृत सरकार होने का आरोप लगाया गया था।
एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार विश्वास प्रस्ताव का सामना
एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार जस्टिन ट्रूडो को विश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा। इससे पहले गुरुवार को उन्होंने कंजर्वेटिव द्वारा पेश किए गए विश्वास प्रस्ताव पर जीत हासिल की थी। जनमत सर्वेक्षण में 20 अंकों की बढ़त पाने के बाद टोरी नेता पियरे चुनाव की उम्मीद कर रहे थे। दरअसल, वामपंथी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) ने पिछले महीने लिबरल्स के साथ गठबंधन समझौते को तोड़ दिया था। इससे ट्रूडो सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे थे।
कनाडा की वेस्टमिंस्टर संस्दीय प्रणाली में एक सत्तारूढ़ पार्टी को हाउस ऑफ कॉमंस का विश्वास बनाए रखना जरूरी है। आसान शब्दों में कहा जाए तो सत्तारूढ़ पार्टी को अधिकांश सदस्यों का समर्थन बनाए रखना आवश्यक है। वर्तमान समय में लिबरल के पास 153 सीटें, कंजर्वेटिव के पास 119 और ब्लॉक क्यूबेकॉइस के पास 33 और एनडीपी के पास 25 सीटें हैं। साल 2015 में ट्रूडो ने अपनी सरकार बनाई थी, जिसके बाद वे लगातार दो बार 2019 और 2021 में सत्ता में बरकरार रहने में कामयाब रहे। हालांकि, पिछले कुछ समय से उनकी लोकप्रियता में गिरावट देखने को मिली है। हाल के महीनों में उन्हें कई असफलताओं का सामना करना पड़ा है, जिसमें पार्टी के दो मजबूत गढ़ में उनकी हार शामिल है।