इस कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद और आईएमएफ संयोजक, सतनाम सिंह संधू, आईएमएफ के सह-संस्थापक प्रोफेसर हिमानी सूद, अन्य गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षाविदों, व्यापारिक नेताओं और थाई-भारतीय के सम्मानित सदस्यों ने भाग लिया।
थाई-भारतीय समुदाय ने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को थाईलैंड भेजे जाने पर खुशी जताई। उन्होंने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम को सराहा और कहा कि इससे दोनों देशों के बीच गहरे धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे।
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दरअसल, बैंकॉक में भारतीय दूतावास में भारतीय अल्पसंख्यक फाउंडेशन (आईएमएफ) द्वारा लचीले इंडो-पैसिफिक भविष्य के निर्माण के लिए थाई-भारतीय समुदाय की भूमिका विषय पर सद्भावना कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें शामिल थाई-भारतीय समुदाय ने कहा कि पीएम मोदी ने स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक देशों को मजबूत और प्रगतिशील नेतृत्व प्रदान किया है। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रभुत्व मुक्त शांति और स्थिरता के लिए पीएम मोदी के रुख की भी सराहना की।
आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद और आईएमएफ संयोजक, सतनाम सिंह संधू, आईएमएफ के सह-संस्थापक प्रोफेसर हिमानी सूद, अन्य गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षाविदों, व्यापारिक नेताओं और थाई-भारतीय के सम्मानित सदस्यों ने भाग लिया। इस समुदाय में सिख, बौद्ध, हिंदू और दाऊदी बोहरा मुस्लिम शामिल थे।
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इसलिए 10 वर्षों से भारत-थाईलैंड के विकसित हुए हैं संबंध
थाईलैंड में भारतीय प्रवासियों ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री मोदी ने लुक ईस्ट को एक्ट ईस्ट नीति में जारी रखने की घोषणा की है, थाईलैंड और भारत के बीच संबंध पिछले 10 वर्षों में विकसित हुए हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच थाईलैंड और अन्य हिंद-प्रशांत देशों के साथ भारत की साझा रणनीतिक समुद्री सीमा भू-राजनीतिक महत्व रखती है।
बौद्ध समुदाय के सदस्यों ने फरवरी से मार्च 2024 तक थाईलैंड में बुद्ध और उनके दो शिष्यों के अवशेष भेजकर अस्थायी रूप से स्थापित करने के लिए पीएम मोदी के इस कदम पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में पीएम मोदी के संदेश और बौद्ध धर्म के सिद्धांतों के माध्यम से ग्रह को संघर्ष और हिंसा से बचाने के भारत के मिशन की सराहना की।