पिछले महीने वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस कांस्टेबल (पीसी) के पद से इस्तीफा देने वाली शरणजीत कौर (41 वर्षीय) के मामले की जांच ब्रिटेन के स्वतंत्र पुलिस आचरण कार्यालय (आईओपीसी) ने की थी। इसके बाद उस पर आरोप तय किए थे।
शरणजीत कौर पिछले हफ्ते बर्मिंघम मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश हुई थी और उसे (12 वर्षीय छात्र) की पिटाई करने का दोषी ठहराया गया था व 12 महीने की सामुदायिक सजा सुनाई गई थी।
आईओपीसी ने कहा कि उसने शुरुआत में पिछली सुनवाई में अपराध से इनकार किया था। आईओपीसी के क्षेत्रीय निदेशक डेरिक कैंपबेल ने कहा, पुलिस अधिकारी केवल तभी बल का उपयोग कर सकते हैं, जब यह परिस्थितियों में आवश्यक और उचित हो। अधिकारी का लड़के पर हमला करने कोई औचित्य नहीं था। उसके लिए कोई वास्तविक जोखिम नहीं था।
इसने आगे कहा, पुलिस कांस्टेबल कौर के कृत्य में पुलिसिंग में जनता के भरोसे को कम करने की क्षमता थी। उन्हें बिल्कुल सही तरीके से जवाबदेह ठहराया गया है।
आईओपीसी जांच के विवरण के अनुसार, पिछले साल 13 अक्तूबर को हुई घटना के मोबाइल फुटेज को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित किया गया था, जिसके कारण वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस से आचरण पर सवाल खड़े हुए।
घायल लड़के के परिवार की ओर से भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। मजिस्ट्रेट को बताया गया कि कौर ने अक्तूबर 2022 में शहर के ग्रेट किंग स्ट्रीट नॉर्थ इलाके में स्कूली छात्रों के झगड़े के दौरान हस्तक्षेप किया था। आईओपीसी जांचकर्ताओं द्वारा एकत्र किए गए सबूतों से संकेत मिले थे कि न्यू टाउन में रहने वाली कौर ने एक लड़के को समूह से दूर धकेल दिया और फिर कार की चाबी का एक सेट पकड़े हुए उसके चेहरे पर वार किया।