सिखों के लिए अलग देश की मांग करने वालों को एक ब्रिटिश सिख एसोसिएशन ने फटकार लगाई है। एसोसिएशन ने ऐसे लोगों को ब्रिटिश पासपोर्ट छोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि ये लोग पंजाब जाकर प्रदर्शन करें ताकि पता चले कि वो लोग इसके लिए कितने गंभीर हैं।
इससे पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने यह सुनिश्चित किया था कि उनकी सरकार अलग आजाद देश के आंदोलन का समर्थन नहीं करेगी। दो दिन पहले ब्रिटिश कारोबारी लॉर्ड रमींदर (रमी) रेंगर ने ट्वीट किया, आज मैंने प्रधानमंत्री जॉनसन से बात की।
उन्होंने सुनिश्चित किया है कि ब्रिटिश सरकार सिखों के लिए आजाद मुल्क के आंदोलन का समर्थन नहीं करेगी। धन्यवाद, प्रधानमंत्री। उनके इस पोस्ट पर लेबर पार्टी की सांसद प्रीत कौर गिल ने कहा, आत्मनिर्णय का सिद्धांत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 1 में प्रमुखता से शामिल है। इस बयान के लिए उन्हें ब्रिटेन में रह रहे सिखों ने ट्रोल किया था।
पेशे से पत्रकार कुलदीप सिंह शेखावत ने कहा, यह आंदोलन एक फर्जी आइडिया है। भारत में ऐसा कोई नहीं है जो अलग देश की मांग कर रहा है। भारतीय सिख जानते हैं कि भारत उनके लिए है और वो भारत के लिए हैं।
हालांकि, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर काम कर रही सिख फेडरेशन यूके ने गिल का समर्थन करते हुए कहा, सिखों का अपनी मातृभूमि पर कानूनी और ऐतिहासिक अधिकार है, अंग्रेजों ने सिख साम्राज्य के साथ संधि पर हस्ताक्षर किए जो आज वैध हैं।