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UK: कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की 34वीं बरसी मनाने को लेकर ब्रिटेन की संसद में प्रस्ताव पेश, जानें पूरा मामला

Thu, 18 Jan 2024 11:04 PM IST
आदर्श शर्मा वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, लंदन

सार

ब्रिटेन की संसद में जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की 34वीं बरसी मनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया। अर्ली डे मोशन(ईडीएम) के कहा गया कि 'यह सदन जनवरी 1990 में जम्मू-कश्मीर की निर्दोष आबादी पर सीमा पार इस्लामी आतंकवादियों और उनके समर्थकों द्वारा हमलों की 34वीं बरसी को गहरे दुख और निराशा के साथ मनाता है। साथ ही कहा कि हम पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं।
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ब्रिटेन का झंडा - फोटो : ANI
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विस्तार
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ब्रिटेन की संसद में जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की 34वीं बरसी मनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया। ब्रिटेन के तीन सांसद बॉब ब्लैकमैन, जिम शैनन, वीरेंद्र शर्मा ने हाउस ऑफ कॉमन्स में अर्ली डे मोशन(ईडीएम) पेश किया। ईडीएम हाउस ऑफ कॉमन्स में बहस के लिए प्रस्तुत किए गए औपचारिक प्रस्ताव है। गौरतलब है कि यह ब्रिटिश सांसदों के लिए किसी घटना या मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने का एक तरीका हैं।
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कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की 34वीं बरसी पर अर्ली डे मोशन पेश
अर्ली डे मोशन(ईडीएम) के कहा गया कि 'यह सदन जनवरी 1990 में जम्मू-कश्मीर की निर्दोष आबादी पर सीमा पार इस्लामी आतंकवादियों और उनके समर्थकों द्वारा हमलों की 34वीं बरसी को गहरे दुख और निराशा के साथ मनाता है। साथ ही कहा कि हम पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। ब्रिटेन की संसद में पेश हुए प्रस्ताव में जम्मू और कश्मीर में मौजूद पवित्र स्थलों के अपमान की निंदा की गई है। प्रस्ताव में कहा गया कि चिंता है कि हिंसा के कारण भागे कश्मीरियों को अभी तक न्याय नहीं मिला है। यहां तक कि उनके खिलाफ किए गए अत्याचारों की पहचान नहीं हुई है। हम ऐसे सीमा पार आतंकवादी हमलों को प्रायोजित करने वालों की कड़ी निंदा करते हैं। साथ ही प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं की लगातार हत्याओं की निंदा करते हैं। 

'कश्मीरी पंडितों को मिलें न्याय'
ब्रिटेन की संसद में पेश प्रस्ताव में कहा गया कि जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की संपत्तियों पर कब्जा अभी भी जारी है। भारत सरका से आग्रह है कि वह जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार को पहचानने और स्वीकार कने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करें। भारतीय संसद में कश्मीर नरसंहार अपराध दंड और अत्याचार निवारण विधेयक पास कर कश्मीरी पंडितों को न्याय दिया जाए। साथ ही प्रस्ताव में ब्रिटेन सरकार से इस नरसंहार के पीड़ितों की रक्षा और न्याय की मांग करने की यूके की प्रतिबद्धता को बढ़ाने का आग्रह किया गया। 
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