ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने सोमवार को अपने एक फैसले में कहा कि कुछ प्रवासियों को उनकी मांग पर रवांडा निर्वासित करने की ब्रिटिश सरकार की योजना वैध है। हाईकोर्ट के जज जस्टिस क्लाइव लुईस ने अपने फैसले में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के कार्यकाल में शुरू की गई आव्रजन नीति रिफ्यूजी कन्वेंशन के अनुरूप है। इस नीति को ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक का भी समर्थन हासिल है।
हालांकि, जज ने आगाह किया कि ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन को लोगों को अफ्रीकी देश रवांडा में निर्वासित करने से पहले उनकी विशेष परिस्थितियों को समझना चाहिए। जस्टिस लुईस ने पांच दिन की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया कि ब्रिटिश सरकार की रवांडा में शरण चाहने वालों को निर्वासित करने की नीति वैध है, जो उनके शरण के दावों के अनुरूप है।
बता दें, देश में अवैध प्रवासन से निपटने के लिए ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल द्वारा घोषित विवादास्पद नीति की वैधता पर महीनों की अनिश्चितता के बाद यह निर्णय आया है। इसे ब्रिटिश सरकार की ऐतिहासिक जीत माना जा रहा है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद रवांडा में निर्वासित किए जाने वाले पहले आठ शरणार्थियों को भेजने से पहले उनकी परिस्थितियों पर विचार किया जाएगा। इन शरणार्थियों को अब गृह मंत्री ब्रेवरमैन के कार्यालय में आवेदन देना होगा।
यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने नीति पर लगाई थी रोक
यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) ने इस साल की शुरुआत में इन शरणार्थियों को रवांडा भेजने से ठीक पहले रोक लगा दी थी और आदेश दिया था कि नीति की वैधता की जांच पूरी होने के तीन सप्ताह बाद तक किसी भी शरणार्थी को ब्रिटेन से रवांडा नहीं भेजा जा सकती है।
ऐसी उम्मीद की जा रही है कि ब्रिटिश सरकार की रवांडा नीति को कानूनी चुनौती देने वाली संस्थाएं हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ अपील कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपील की अनुमति दी जाए या नहीं, इस पर फैसला जनवरी 2023 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।