दुनिया में स्वचालित कारों को सड़कों पर चलाने की कानूनी अनुमति देने वाला ब्रिटेन पहला देश बन गया है। बुधवार को ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की है कि खुद से चलने वाली कारें मोटरवे पर धीमी रफ्तार में चलाई जा सकेंगी। देश के परिवहन मंत्रालय ने कहा है कि हाईवे कोड को नए नियमों के अनुकूल बनाने के लिए सही शब्द तलाशे जा रहे हैं ताकि स्वचालित कारों का सुरक्षित इस्तेमाल किया जा सके।
मंत्रालय ने बताया कि नए नियमों के तहत पहला बदलाव ऑटोमेटेड लेन कीपिंग सिस्टम्स (एएलकेएस) का होगा जिसके जरिये ऐसे सेंसर और सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किए जाएंगे कि ऐसी कारें अपनी लाइन में रहकर ब्रेक लगाएं और जरूरत के हिसाब से रफ्तार को घटा या बढ़ा सकें। ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि एएलकेएस का इस्तेमाल मोटरवे तक ही सीमित होगा और अधिकतम रफ्तार 60 किलोमीटर प्रतिघंटा रहेगी।
मंत्रालय ने बताया, ब्रिटिश सरकार चाहती है कि स्वचालित वाहनों को सड़कों पर उतारने के मामले मे उनका देश दुनिया का नेतृत्व करे। परिवहन मंत्रालय का अनुमान है कि 2035 तक देश की 40 फीसदी कारों से 38 हजार नई नौकरियां पैदा होंगी। कार उद्योग से जुड़ी संस्था सोसाइटी ऑफ मोटर मैन्युफैक्चरर्स एंड ट्रेडर्स के सीईओ माइक हॉज ने इस कदम का स्वागत किया है।
बीमा कंपनियां आशंकित, बढ़ सकते हैं हादसे
ब्रिटेन की बीमा कंपनियां सरकार के इस कदम को लेकर आशंकित हैं। इन कंपनियों का कहना है कि कार बनाने वाली कंपनियां और नियामक संस्थाएं यदि तकनीक में मौजूद कमियां दूर नहीं करते हैं तो यह कदम उलटा भी पड़ सकता है। बीमा कंपनियों को आशंका है कि एएलकेएस को ऑटोमेटेड या स्वचालित कहने से कार ड्राइवर्स यह समझ सकते हैं कि कारें खुद को ड्राइव कर सकती हैं, जिससे हादसे बढ़ेंगे।
तकनीक का गलत इस्तेमाल बढ़ सकता है
एएलकेएस प्रणाली का परीक्षण करने वाली संस्था थैचम रिसर्च के शोध निदेशक मैथ्यू एवरी कहते हैं, हमारी चिंता यह है कि इस सिस्टम को ऑटोमेटेड कहकर सरकार लोगों को उलझा रही है। इससे ऐसी तकनीक का गैर-वाजिब इस्तेमाल बढ़ सकता है जिसके कारण पहले ही कई त्रासदियां हो चुकी हैं। बता दें कि अमेरिकी अधिकारी टेस्ला कंपनी की ऐसी कारों से हुए 20 हादसों की अभी जांच कर रहे हैं।