ब्रिटिश सेना के प्रमुख ने रविवार को कहा कि दुनिया इसका सही अनुमान नहीं लगा सकी कि तालिबान इतनी जल्दी अफगानिस्तान पर कब्जा कर लेगा। कुछ दिन पहले ही ब्रिटेन की सरकार ने माना था कि इस तरह की खुफिया जानकारी मिली हैं कि इस साल काबुल पर कब्जा होने के आसार नहीं हैं।
पिछले महीने अफगानिस्तान पर तालिबान की वापसी से अमेरिका और अन्य देश सतर्क हो गए थे और नाटो सैनिकों के देश छोड़ने के बाद पश्चिम द्वारा समर्थित अफगान सेना और सरकार का आश्चर्यजनक रूप से तेजी से पतन होने लगा था।
ब्रिटेन की सेना के प्रमुख, जनरल निक कार्टर ने बीबीसी से कहा, ‘इस रफ्तार ने हमें हैरान कर दिया और मुझे नहीं लगता कि हम ऐसा कुछ समझ पा रहे थे कि तालिबान ऐसा कर पाएगा।’
जब उनसे पूछा गया कि क्या सैन्य खुफिया जानकारी गलत थी तो उन्होंने कहा कि सरकार को अनेक सूत्रों से गुप्त जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा, ‘यह विशुद्ध रूप से सेना की खुफिया जानकारी नहीं थी।’
ब्रिटेन और अमेरिका के सैनिकों ने एक सप्ताह पहले अफगानिस्तान छोड़ा था। जिससे देश में उनके 20 साल के सैन्य अभियान का अंत हो गया। जिस तरह से पश्चिम देश अफगानिस्तान से पीछे हट गए, इससे उनकी आलोचना होती रही है, इस सवाल के साथ कि तालिबान इतनी गति से देश पर नियंत्रण कैसे कर पाया।
विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने पिछले सप्ताह सांसदों से कहा था कि खुफिया आकलन यह है कि अगस्त में सुरक्षा संबंधी हालात बिगड़ेंगे लेकिन इस साल काबुल पर कब्जा होने के आसार नहीं हैं। हालांकि तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर नियंत्रण कर लिया और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी को देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात जाना पड़ा।
यह आकलन गलत कैसे हुआ, इस सवाल के जवाब में निक ने कहा, ‘सीधा जवाब यही है कि सभी ने गलत अंदाज लगाया। तालिबान को भी उम्मीद नहीं थी कि इतनी तेजी से चीजें बदल जाएंगी और वह अफगानिस्तान पर कब्जा कर लेगा।’