बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस (फाइल)
- फोटो : पीटीआई
बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफा देने के बाद बनी अंतरिम सरकार का गठन हो चुका है। रविवार को अंतरिम सरकार के सलाहकार परिषद के सदस्य के तौर पर पूर्व राजदूत सुप्रोदीप चकमा और डॉ. बिधान रंजन रॉय पोद्दार ने शपथ ली। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पोद्दार और चकमा को पद की शपथ दिलाई। इस दौरान सरकार के मुख्य सलाहकार नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर डॉ. मुहम्मद यूनुस भी शामिल रहे।
बांग्लादेश में अंतरिम सरकार की सलाहकार परिषद के सदस्यों ने गुरुवार को शपथ ली थी। यह परिषद देश को चलाने में यूनुस की सहायता करेगी। जबकि पूर्व राजदूत और चटगांव हिल ट्रैक्ट्स डवलपमेंट बोर्ड के अध्यक्ष चकमा और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के पूर्व निदेशक डॉ. पोद्दार ढाका से बाहर होने के चलते गुरुवार को शपथ नहीं ले सके थे। इसके अलावा स्वतंत्रता सेनानी फारूक-ए-आजम भी शपथ नहीं ले सके। डॉ. पोद्दार और चकमा को रविवार को राष्ट्रपति ने शपथ दिलाई।
मोहम्मद यूनुस ने गुरुवार को अंतरिम सरकार के प्रमुख के तौर पर शपथ ली। अंतरिम सरकार की देखरेख में ही अगले कुछ महीनों में चुनाव कराए जाने की बात कही गई है। देश में सियासी उथल पुथल और प्रदर्शन को देखते हुए बांग्लादेश में ढाका विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. मकसूद कमाल और बांग्ला अकादमी के महानिदेशक प्रोफेसर डॉ. एमडी हारुन-उर-रशीद अस्करी सहित कई शीर्ष अधिकारियों ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
बांग्लादेश में क्यों भड़की हिंसा?
बांग्लादेश में 1971 में देश की आजादी के लिए लड़ने वाले स्वतंत्रतता सेनानियों के लिए तय किए आरक्षण के खिलाफ जुलाई में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। धीरे-धीरे ये विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए और छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग की जाने लगी। ये विरोध प्रदर्शन इतने हिंसक हो गए कि पांच अगस्त को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपने पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा।