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Bangladesh: चुनाव से पहले BNP के सामने जमात की पेशकश; जनमत सर्वेक्षण में दोनों दल करेंगे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

Thu, 01 Jan 2026 05:43 AM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले गठबंधन की कोशिशें शुरू होने लगी है। इस कड़ी में जमात-ए-इस्लामी ने बीएनपी के सामने मिलीजुली सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा है। सर्वेक्षणों के मुताबिक फरवरी में होने वाले चुनावों में बीएनपी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी। जबकि जमात इस चुनाव में दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभर सकती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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बांग्लादेश में किसी वक्त प्रतिबंध का शिकार रह चुकी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी इस बार फरवरी में हो रहे चुनावों में देश की प्रमुख राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी बनने जा रही है। जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि जमात-ए-इस्लामी लगभग 17 वर्षों में पहली बार चुनाव लड़ रही है और इस चुनाव में वह बीएनपी के बाद दूसरे स्थान पर रहेगी। जमात का कहना है कि फरवरी में चुनाव के बाद पार्टी मिलीजुली सरकार के लिए तैयार है।
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सर्वेक्षणों के मुताबिक फरवरी में होने वाले चुनावों में बीएनपी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी। वहीं दूसरे स्थान पर रहने वाली जमात के प्रमुख शफीकुर रहमान ने कई दलों से बात कर मिलीजुली सरकार का बयान दिया है। यह 17 करोड़ की आबादी वाले मुस्लिम बहुल देश में राजनीतिक वापसी का प्रतीक है। जमात ने 2001 से 2006 के बीच बीएनपी के साथ गठबंधन सहयोगी के रूप में सत्ता संभाली थी। शफीकुर ने कहा, हम पांच वर्षों के लिए एक स्थिर राष्ट्र देखना चाहते हैं।

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इस्लामी शासन की पैरोकारी को छोड़ा
जमात शरिया कानून के तहत इस्लामी शासन की वकालत करती है, लेकिन उसने अपने रूढ़िवादी आधार से परे हटकर यह पैरोकारी छोड़ दी है। पार्टी द्वारा अपनी अपील को व्यापक बनाने के तहत शफीकुर रहमान ने कहा, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान किसी भी एकता सरकार का साझा एजेंडा होना चाहिए। वह बोले, पीएम उस पार्टी से होगा जिसे सर्वाधिक सीटें मिलेंगी। यदि जमात को सबसे अधिक सीटें मिलीं, तो पार्टी तय करेगी कि प्रधानमंत्री स्वयं उम्मीदवार होंगे या नहीं।

2013 से जमात पर लगा प्रतिबंध
अपदस्थ पीएम शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी अब चुनाव से प्रतिबंधित है। हसीना कार्यकाल में जमात पर 1971 के पाकिस्तानी स्वतंत्रता संघर्ष में युद्ध अपराधों के लिए कई नेताओं को मौत की सजा सुनाई गई। युद्ध का जमात ने विरोध किया था। 2013 से जमात पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन यूनुस सरकार ने अगस्त 2024 में पार्टी पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए।

भारत से संबंध कायम रखने की पक्षधर जमात
रहमान ने कहा कि ढाका से भागने के बाद हसीना का भारत में रहना चिंता का विषय है, क्योंकि उनके पतन के बाद से दोनों देशों के संबंध दशकों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। लेकिन शफीकुर रहमान ने कई अंतरविरोधों के बावजूद इस साल की शुरुआत में एक भारतीय राजनयिक से मुलाकात की। उन्होंने कहा, हमें सभी के प्रति और एक-दूसरे के प्रति खुला होना चाहिए। वह बोले थे कि भारत से संबंधों को विकसित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय ने रहमान के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन एक भारतीय सरकारी सूत्र ने विभिन्न पार्टियों से संपर्क की पुष्टि की।
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पाकिस्तान से भी निकटता जताई
पाकिस्तान के साथ जमात की ऐतिहासिक निकटता के बारे में पूछे जाने पर रहमान ने कहा- हम सभी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखते हैं। हम कभी भी किसी एक देश की ओर झुकाव रखने में रुचि नहीं रखते। बल्कि हम सभी का सम्मान करते हैं और राष्ट्रों के बीच संतुलित संबंध चाहते हैं। जमात अध्यक्ष शफीकुर ने कहा, अगर पार्टियां एक साथ आती हैं, तो हम मिलकर सरकार चलाएंगे। यह बयान पार्टी द्वारा एक युवा पीढ़ी की पार्टी के साथ गठबंधन के बाद दिया गया है।


 
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