टीकों का कम होता असर चिंता का विषय
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के प्रोफेसर अजीज शेख ने कहा कि वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ाई में टीके प्रमुख हथियार रहे हैं, लेकिन समय के साथ उनके प्रभाव में कमी आना चिंता का विषय है। इस अध्ययन में उन लोगों के परिणामों की तुलना करके समान पखवाड़े के अंतराल पर टीके की प्रभावशीलता का अनुमान लगाया है, जिन्हें टीका नहीं लगाया गया है। इस अध्ययन ने कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर भी आशंकाओं को बढ़ा दिया है।
प्रोफेसर शेख ने आगे कहा कि इस बात की पहचान करके कि एस्ट्राजेनेका के कोविड रोधी टीके के असर में कमी की शुरुआत कब होती है, सरकारों को यह निर्धारित करने में मदद मिल सकेगी कि लोगों को टीके की बूस्टर खुराक देने के कार्यक्रमों को कब और किस तरह शुरू किया जाए। अध्ययन में ब्राजील और स्कॉटलैंड दोनों ही स्थानों पर डाटा के विश्लेषण में इस टीके के प्रभाव में कमी होने की शुरुआत लगभग 12 सप्ताह यानी तीन महीने सामने आई है।