कानून में प्रावधान है कि जो भी कंपनी या संस्था किसी व्यक्ति से उसकी निजी सूचना मांगेगी, उसे अपने सिद्धांत, उद्देश्य और डाटा प्रोसेसिंग की विधि के बारे में उस व्यक्ति को पूरी जानकारी देनी होगी। चीन में ये शिकायत बड़े पैमाने पर है कि जगह-जगह कैमरे लगा कर लोगों की निजी सूचनाओं को रिकॉर्ड किया जाता है। कानून में प्रावधान है कि सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की तस्वीर उतारने या चेहरा पहचानने का उपकरण लगाना गैर-कानूनी होगा। लेकिन इसमें यह प्रावधान भी है कि सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए ऐसा किया जा सकेगा। हालांकि यह प्रावधान जरूर किया गया है कि ऐसे कैमरों पर स्पष्ट निशान लगा होना चाहिए, ताकि लोगों को उसके वहां मौजूद होने की जानकारी मिल सके।
विश्लेषकों का कहना है कि चीन में निजता हनन की असल शिकायत सरकारी तंत्र से है। चूंकि इस कानून में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए चेहरा पहचानने के उपकरण लगाने की इजाजत दी गई है, इसलिए लोगों को राहत मिलने की संभावना कम है। विश्लेषकों के मुताबिक ये संभव है कि ये कानून लागू होने के बाद लोगों की निजी जिंदगी में प्राइवेट कंपनियों का दखल कम हो जाए, लेकिन सरकारी दखल से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। फिर भी इसे एक सकारात्मक बात समझा गया है कि लोगों के निजी डाटा के संग्रहण के लिए अब वैधानिक व्यवस्था की गई है। पहले इस संबंध में कोई कानून नहीं था।
चीन में 2020 के अंत तक लगभग 99 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे थे। देश में 44 लाख से ज्यादा वेबसाइट और लगभग 35 लाख एप थे। इन सबसे निजी सूचनाओं का संग्रहण किया जा रहा था।