दूसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर दुनिया भर में योग की धूम रही। टाइम्स स्क्वायर न्यूयॉर्क से लेकर सिडनी और यूरोपीय यूनियन समेत कई देशों में योग को लोगों ने एक महोत्सव की तरह मनाया। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा कि योग का संदेश ‘सद्भावना को बढ़ावा देना’ है। उन्होंने सभी देशों के नागरिकों से कहा कि वे नस्ल, आस्था, लैंगिक पहचान से ऊपर उठकर एकता का संकल्प लें।
इस अवसर पर मून ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मैं सभी लोगों से आग्रह करता हूं कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं तथा सब के साथ एकता का संकल्प लें। इस दिन और हर दिन को समान मानव परिवार के सदस्य के तौर पर मनाएं।
वरिष्ठ राजनयिक और म्यांमार मामले पर मून के विशेष सलाहकार विजय नांबियार ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव का योग दिवस पर संदेश पढ़ा। यहां योग कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे आध्यात्मिक गुरु सदगुुरु जग्गी वासुदेव ने कहा है कि योग अब भारत का ही नहीं रहा। यह तो अब पूरी दुनिया के लिए भारत का तोहफा है।
उधर ब्रुसेल्स में आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर ने यूरोपीय यूनियन की संसद में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग का सर्वोच्च लक्ष्य है पूरी दुनिया को एक परिवार बनाना।
रविशंकर ने कहा कि ‘आज मुझे अत्यंत खुशी हो रही है कि यूरोप के मध्य में स्थित यूरोपीय संसद में 48 देशों के प्रतिनिधि योग के जरिये अपने जीवन को स्वस्थ और सुखी रखने का संकल्प ले रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि योग केवल एक व्यायाम नहीं है, यह जीवन को लयबद्ध करता है और स्वयं से साक्षात्कार करवाता है।इसके अलावा योग का कार्यक्रम नेपाल अफगानिस्तान सहित कई देशों में मनाया गया।