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ट्रंप ने एक बार फिर कहा 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन', क्या इससे भारत को नुकसान ?

Fri, 02 Jun 2017 11:37 AM IST
amarujala.com-बीबीसी हिंदी
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पेरिस समझौते से बाहर निकलने का फैसला कर चुके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपना चुनावी नारा दोहराया है। ट्रंप ने ट्विटर पर लिखा, ''मेक अमेरिका ग्रेट अगेन,'' यानी अमेरिका को फिर से महान बनाएंगे। इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप के पेरिस समझौते से बाहर जाने फैसले पर कहा था- हम प्लेनेट को फिर से महान बनाएंगे।
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राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे पहले कहा


. पेरिस समझौता चीन और भारत जैसे देशों को फायदा पहुंचाता है। ये समझौता अमेरिका की संपदा को दूसरे देशों में बांट रहा है। भारत अरबों डॉलर की विदेशी मदद लेकर समझौते में शामिल हुआ है।
. हम एक नए सिरे से नया समझौता करेंगे, जिससे अमेरिकी हितों की रक्षा हो सके।
. मैं एक ऐसा समझौता करना चाहूंगा जो अमेरिका के औद्योगिक हितों की रक्षा करे और लोगों की नौकरियां बचाता हो।
. पेरिस समझौता ऐसा उदाहरण है जब वॉशिंगटन ने दूसरे देशों के फायदे के लिए अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचाया। अमेरिका आज से ही गैर बाध्यकारी पेरिस समझौते को लागू करना बंद कर देगा।
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. हम नहीं चाहते कि दुनिया के नेता और देश हम पर हंसे। वो अब हम पर नहीं हंसेगे।
. मैं पीट्सबर्ग के नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया हूं न कि पेरिस का प्रतिनिधित्व करने के लिए।
. मैंने वादा किया था कि मैं हर उस समझौते को तोड़ दूंगा या फिर से बातचीत करूंगा जो अमेरिका के हितों का ध्यान नहीं रखता है।
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ट्रंप ने पूरा किया चुनावी वादा?

बीते साल जब ट्रंप हिलेरी क्लिंटन के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल थे। जब ट्रंप ने चुनावी प्रचार के दौरान अमेरिका को जलवायु परिवर्तन समझौते से बाहर कराने का वादा किया था। दरअसल ट्रंप ने साल 2011 में मेक अमेरिका ग्रेट अगेन कहा था।

तब वो राष्ट्रपति पद की दौड़ में तो शामिल नहीं थे लेकिन उन्होंने कहा था, ''मैं अपने सारे विकल्प खुले रखना चाहता हूं। क्योंकि हमें अमेरिका को फिर से महान बनाना होगा।'' इसके बाद जब ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हुए, तब ये उनका चुनावी नारा बना।

क्या है पेरिस समझौता?

जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग का मतलब है उद्योगों और कृषि कार्यों से उत्सर्जित होने वाली गैसों से पर्यावरण पर होने वाले नकारात्मक और नुकसानदेह असर। पेरिस समझौते का मकसद गैसों का उत्सर्जन कम कर दुनियाभर में बढ़ रहे तापमान को रोकना था।

वैश्विक तापमान को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना और कोशिश करना कि वो 1।5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़े। मानवीय कार्यों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को इस स्तर पर लाना की पेड़, मिट्टी और समुद्र उसे प्राकृतिक रूप से सोख लें। इसकी शुरुआत 2050 से 2100 के बीच करना।

हर पांच साल में गैस उत्सर्जन में कटौती में प्रत्येक देश की भूमिका की प्रगति की समीक्षा करना। विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्तीय सहायता के लिए 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष देना और भविष्य में इसे बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता।
 
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ट्रंप के ट्वीट पर लोगों की चुटकी

@AynRandPaulRyan ने ट्रंप के ट्वीट पर जवाब देते हुए लिखा, ''दुर्भाग्य से आपके पेरिस समझौते से बाहर आने के फैसले के चलते हम सब पानी में समा जाएंगे।'' अन्ना अकाना ने लिखा, ''ट्रंप आप इस्तीफा दे दीजिए।'' निक ने लिखा, ''जब राष्ट्रपति को क्लाइमेंट चेंज से ज्यादा कैपसलॉक पर यकीन हो तो मानिए कि अमेरिका मुसीबत में है।''

ट्रंप के इस ट्वीट के सारे अल्फाबेट्स कैपिटल हैं। इस पर तंज करते हुए @ZaackHunt कहते हैं, ''मुझे लगता है कि आपका कैप्सलॉक बटन दबा रह गया है।'' जेमी कहते हैं, ''एक बार आप दफ्तर से बाहर निकल जाएं तो हम अमेरिका को महान बनाने की सोच सकते हैं।''
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