श्वेत विशेषाधिकार?
एक और बात के लिए बेनेट की आलोचना की गई। कहा गया कि वो आसानी से खुले में हथियार लेकर घूम सकती हैं, लेकिन जातीय तौर पर अल्पसंख्यक लोग- जो पहले से भेदभाव का शिकार हैं और संदेह के घेरे में रहते हैं- अगर वो ऐसा करते हैं तो उन्हें सरकार की हिंसक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
2016 में फिलांडो कैसटाइल नाम के एक अश्वेत शख्स को पुलिस ने ट्रैफिक स्टॉप पर इसलिए गोली मार दी थी कि उनके पास लाइसेंस वाला हथियार है। बेनेट ने इस बात के जवाब में कहा कि वो मानती हैं कि श्वेत होने की वजह से उनके पास यह विशेषाधिकार है कि वो 'नस्लवाद' के डर के बिना राइफल लेकर आ सकीं। कई लोगों ने कहा कि बेनेट का खुद का रवैया नस्लवादी है।
सरकार का अत्याचार
बेनेट की पोस्ट पर इतना विवाद शायद इसलिए भी हुआ क्योंकि उन्होंने इसे 1970 में कैंट स्टेट शूटिंग से जोड़ दिया था। इस शूटिंग की वजह से अमरीका में भारी प्रदर्शन हुए थे। बेवसाइट 'द वर्ज' की कल्चर एडिटर लॉरा हडसन ने अपनी मां से बेनेट की सोच के बारे में पूछा। दरअसल लॉरा की मां कैंट शूटिंग के दौरान मौजूद थीं।
उनकी मां ने जवाब दिया, "अगर इस महिला ने अपने सामने लोगों को मरते हुए देखा होता तो वो बंदूक रखने का इतना समर्थन नहीं कर रही होती।"
"अगर उस घटना के वक्त छात्रों के पास भी बंदूकें होतीं तो यह जनसंहार और भी भयानक होता। और ज्यादा लोग मारे जाते। जब आप किसी को अपने सामने मरते हुए देखते हैं तो यह आपको हमेशा के लिए बदल देता है।" गन राइट्स की वकालत करने वाले लोगों का कहना है कि दूसरे संशोधन का मकसद आत्म रक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि सरकार के अत्याचारों के खिलाफ लड़ने का है। उनका मानना यह है कि संविधान के निर्माताओं ने यह संशोधन इसलिए किया था ताकि जब सरकार नागरिकों के अधिकारों पर हमला करें तो हथियारबंद नागरिक उनसे लड़ सकें।
बेनेट ने बताया कि ट्विटर पोस्ट से मिली लोकप्रियता के बाद बंदूकें बेचने वाली ओहायो की एक कंपनी ने उन्हें नौकरी की पेशकश की है। हालांकि उनका कहना है कि वो कैंट स्टेट और दूसरी जगहों के लिए गन राइट्स की वकालत करती रहेंगी।