इस हफ्ते अमेरिका और उत्तर कोरिया में तनातनी युद्ध की धमकी तक जा पहुंची तो दुनिया भर की नजरें अचानक से गुआम पर जा टिकी हैं। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने गुआम पर हमले की खबर चलाई थी। उत्तर कोरिया के सैन्य अधिकारियों ने योजना पेश की कि कैसे उत्तर कोरियाई मिसाइलें प्रशांत महासागर के इस द्वीप को इसी महीने निशाने पर लेंगी।
उत्तर कोरिया ने यह धमकी अमेरिका के राष्ट्रपति के उस बयान के बाद दी जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर उत्तर कोरिया का आक्रामक व्यवहार नहीं थमा तो उसे ऐसे हमले का सामना करना पड़ेगा जिसे दुनिया ने कभी नहीं देखा होगा। इस तनाव के बीच एक खुफिया रिपोर्ट यह भी आई कि उत्तर कोरिया की मिसाइलें छोटे परमाणु हथियारों से लैस होने में सक्षम हैं। गुआम अपेक्षाकृत एक अलग-थलग पड़ा हुआ द्वीप है जिसकी पहचान अमेरिका के सैन्य ठिकाने के रूप में है। गुआम के बारे में हम आपको पांच बातें बता रहे हैं जो काफी दिलचस्प हैं।
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गुआम अमेरिका का कैसे हुआ?
गुआम में पुर्तगाली खोजकर्ता फ्रेडिनेंड मजेलन की दस्तक के 40 साल बाद 1565 में स्पेन ने इस पर दावा किया। 1898 में स्पेन-अमेरिका युद्ध तक गुआम पर स्पेन का शासन रहा। इसके बाद स्पेन ने पेरिस संधि के तहत गुआम को अमेरिका को सौंप दिया। 1941 में पर्ल हार्बर हमले के बाद गुआम पर जापान का अस्थायी रूप से नियंत्रण रहा। हालांकि तीन साल बाद मित्र बलों ने गुआम को फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया।
गुआम 1950 में आधिकारिक रूप से अमेरिकी क्षेत्र बना और यह अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ नेवी के अंतर्गत आता है।1950 में ही अमेरिकी कांग्रेस ने ऑर्गेनिक एक्ट ऑफ गुआम पास किया और वहां के नागरिकों को अमेरिकी नागरिकता मिली। हालांकि गुआम के लोग अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डालते हैं। गुआम में 1970 में पहली बार एक गवर्नर को चुना गया। 1972 के बाद से अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में गुआम का एक नॉनवोटिंग डेलिगेट है।
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