भारत में हाल में पारित किए गए कुछ कानूनों के कारण कई क्षेत्रों में बाल मजदूरी वैध हो गई है। इसके बाद जो आंकड़े सामने आएंगे उनमें बाल मजदूरी कम होती दिखेगी लेकिन हकीकत में वह बढ़ती जाएगी। मानव तस्करी के क्षेत्र में सक्रिय एक भारतीय एनजीओ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक उच्चस्तरीय बैठक में यह दलील सामने रखी।
अपने आप वुमन वर्ल्डवाइड की प्रतिनिधि रुचिरा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि दो कानून ऐसे हैं जिनका गरीब लड़कियों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इनमें से एक को पिछले साल सितंबर में पारित किया गया है। इसके अनुसार परिवार आधारित व्यवसाय और ऑडियो-विजुअल मनोरंजन के क्षेत्र में बाल मजदूरी वैध हो गई है।
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दूसरे कानून के तहत मानव तस्करी और यौन शोषण को अलग कर दिया है जबकि इन दोनों में गहरा रिश्ता है। बाल मजदूरी और यौन शोषण, दोनों के लिए मानव तस्करी की जाती है। इसलिए इन दोनों का एक साथ मुकाबला करना चाहिए।
इन दोनों कानूनों के कारण बाल मजदूरी और यौन शोषण के लिए की जाने वाली मानव तस्करी के 80 फीसदी पीड़ित अदृश्य हो जाएंगे। इसका नतीजा यह होगा कि आंकड़ों में बाल मजदूरी घट जाएगी।