अमेरिका में वैज्ञानिक पहली बार मनुष्य के दिमाग का पूरा नक्शा जारी करने वाले हैं। इस नक़्शे से इस बात को समझने में मदद मिलेगी कि क्यों कुछ लोग स्वाभाविक रूप से अधिक वैज्ञानिक सोच वाले, संगीत के रसिक या कलाप्रेमी होते हैं।
हाल ही में कुछ चित्रों को अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ़ साइंस की एक बैठक में जारी किया गया।
वैज्ञानिक मैसेच्यूसेट्स के जनरल अस्पताल में मौजूद दुनिया की सबसे ताकतवर ब्रेन स्कैनिंग मशीन से दिमाग का नक्शा तैयार करने में लगे हैं।
इस स्कैनर को चलाने के लिए 22 मेगावाट बिजली की दरकार होती है। इतनी बिजली के साथ एक परमाणु पनडुब्बी बड़े ही आराम से चलती हैं। अभी तक वैज्ञानिकों ने केवल 50 मनुष्यों के गहन स्कैन किए हैं।
दिमाग का स्कैन
वैज्ञानिक दिमाग की बारीक नसों में मौजूद तरल का पीछा करते करते दिमाग की नसों के नक़्शे तैयार करते हैं। नतीजे में वैज्ञानिकों के हाथ लगती हैं किसी दिमाग के भीतर मौजूद रास्तों के थ्री-डी नक़्शे।
इस परियोजना से जुड़े मुख्य वैज्ञानिकों में से एक प्रोफ़ेसर वैन वीडीन दिमाग के स्कैन चित्रों को देख कर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि मनुष्य का दिमाग कैसे काम करता है और तब क्या होता है जब कुछ गड़बड़ हो जाती है।
प्रोफेसर वैन वीडीन कहते हैं, "हमारे सामने इतनी सारी मनोचिकित्सकीय समस्याएं हैं और इन्हें समझने के हमारे तौर तरीके सौ साल से वहीं के वहीं हैं।"
प्रोफ़ेसर वीडीन के अनुसार, "हम दिल का स्कैन कर के अच्छी तरह से बता सकते हैं कि वहां क्या चल रहा है या क्या गलत घट रहा है। कितना अच्छा होगा अगर हम दिमाग की इस तरह की तस्वीरें निकालें और लोगों को सलाह दे पाएं कि उन्हें उनकी समस्या के लिए क्या करना है।"
ह्यूमन कनेक्टोम प्रोजेक्ट
अमेरिकी नेतृत्व में चल रही इस परियोजना का नाम है "ह्यूमन कनेक्टोम प्रोजेक्ट।" अपने पूर्ववर्ती ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट की तरह ही इस परियोजना के ज़रिए जुटाया गया तमाम डाटा सार्वजनिक कर दिया जाएगा ताकि दुनिया में कहीं भी वैज्ञानिक इसका परीक्षण कर सकें।
इस परियोजना में करीब चार करोड़ अमेरिकी डॉलर या करीब 215 करोड़ भारतीय रुपयों के बराबर खर्च आएगा। इस पूरी परियोजना में करीब 1200 अमेरिकी लोगों के दिमागों का स्कैन किए जाने की योजना है।
वैज्ञानिक पहले चरण के 80 से 100 लोगों के दिमागों का स्कैन जल्द ही जारी करने वाले हैं। इस काम में करीब पांच साल का वक़्त लगेगा।
सोच का नक्शा
इस परियोजना पर काम कर रहे वैज्ञानिक स्कैन किए जाने वाले लोगों के अनुवांशिक और व्यवहार संबंधी डेटा को जमा करेंगे ताकि मनुष्य के अंतस का एक खाका तैयार किया जा सके।
मनुष्य के दिमाग की वायरिंग का डायग्राम किसी इलेक्ट्रौनिक यंत्र की वायरिंग से अलग होता है क्योंकि मनुष्य के हर अनुभव के साथ यह बदल जाती है। एक तरह से यह मनुष्य ने क्या और कैसे किया है इसका नक्शा भी होता है।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉक्टर टीम बेन्हंस का कहना है, "इस स्कैन परियोजना से यह भी साफ़ हो जाएगा की क्या वाकई अलग-अलग तरह के मनुष्यों के दिमाग भी अलग-अलग तरह के होते हैं।"
डॉक्टर टीम बेन्हंस ने बीबीसी को बताया, "मनुष्य के दिमाग के हिस्सों के आपस में कनेक्शन अलग-अलग तरह के मनुष्यों में अलग-अलग होते हैं। इनको अगर हम समझ सकें तो हम जान लेंगे कि क्यों कुछ लोग अधिक मोल लेते हैं जबकि कुछ अन्य लोग संभल के चलते हैं।"
इस परियोजना से जुड़े प्रोफ़ेसर स्टीव पीटरसन ने अपना पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित कर रखा है कि दिमाग के कौन से हिस्से मनुष्य को वैज्ञानिक सोच देते हैं और मनुष्य अपने दिमाग में जानकारी को कैसे संभाल कर रखता है।