फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दुनिया का पहला ‘टच द  सन’ मिशन लांच, सूर्य के नजदीक सात साल करेगा अध्ययन

Sun, 12 Aug 2018 04:58 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन

नासा का मिशन पार्कर सोलर प्रोब का ‘टच द सन’ मिशन रविवार को अपने ऐतिहासिक सफर पर रवाना हो गया। 1.5 अरब डॉलर की लागत से तैयार यह मिशन 24 घंटे की देरी से रवाना हुआ। 

विज्ञापन

इस मिशन को 12 अगस्त को ईस्टर्न डे टाइम के अनुसार 3.31 बजे केप कानावेरल एयरफोर्स स्टेशन से रवाना किया गया।

कार के आकार वाला यह यान 4.30 लाख मील प्रति घंटे की रफ्तार से सूरज के 24 चक्कर लगाएगा। सूरज तक पहुंचने की इस यात्रा के दौरान यह यान कई ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण मार्ग से होकर गुजरेगा। इसमें बुध ग्रह का गुरुत्वाकर्षण मार्ग भी इसकी मदद करेगा।

यह भी पढ़ें: सौर मंडल के बाहर 44 नए ग्रहों की खोज, 16 ग्रह पृथ्वी और एक शुक्र के आकार का
विज्ञापन


सूरज के इतने करीब पहुंचने वाला यह अब तक पहला यान होगा। इससे पहले लांच किए गए मिशन सफल नहीं हो सके थे। इससे पहले शनिवार को तकनीकी कारणों से इसे लॉन्च नहीं किया जा सका था।

सूर्य के नजदीक सात साल करेगा अध्ययन
पार्कर सोलर प्रोब सात साल तक सूरज के इर्दगिर्द चक्कर लगाते हुए अध्ययन करेगा। यह यान सूरज की बाहरी परत कोरोना के नजदीक रहेगा। कोरोना का ही तापमान 10 लाख डिग्री सेल्सियस होता है। हालांकि कोरोना को पार करने के बाद सूरज की परत का तापमान 5500 डिग्री सेल्सियस होता है। कोरोना को इनसानी आंखों से सूर्य ग्रहण के दौरान देखा जा सकता है। यह धुंधला सा झिलमिलाता वातावरण होता है।

उड़नतश्तरी बनेगी सन प्रोब की सनस्क्रीन

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने पार्कर सोलर प्रोब को सूरज के अत्यधिक तापमान से बचाने के लिए 8 फुट की उड़न तश्तरी बनाई है। एपीएल में मिशन प्रोजेक्ट साइंटिस्ट निकी फॉक्स ने बताया कि उनकी टीम ने इस रक्षा कवच को उड़न तश्तरी नाम दिया है।  डेल्टा-IV रॉकेट  इसी 72 मीटर लंबे और 15 मीटर चौड़े रॉकेट से पार्कर यान भेजा गया। इस रॉकेट को पार्कर के साथ जमीन से 230 फीट की ऊंचाई पर रखा गया था। 

यह भी पढ़ें: इंडोनेशिया में भूकंप से लोम्बोक द्वीप अपनी जगह से 25 सेमी ऊपर उठा

इसे एक दशक की मेहनत के बाद बनाया जा सका है। यह 4.5 इंच मोटी कार्बन फोम की परत है। यान का जो हिस्सा सूरज की तरफ होगा उस पर सफेद सेरामिक पेंट की परत चढ़ाई गई है, ताकि यह सूरज की गर्मी को वापस भेज सके। 8 फुट चौड़ाई वाली इस सुरक्षा परत का वजन तकरीबन 73 किलोग्राम है। यह सूरज के भयंकर तापमान और पार्कर प्रोब के बीच मजबूती से बनी रहेगी।

भौतिकशास्त्री के नाम पर विमान का नाम
इस यान का नाम फिजिसिस्ट यूजीन न्यूमैन पार्कर के नाम पर रखा गया है। इन्होंने तारों द्वारा ऊर्जा संचारित करने की कई अवधारणाएं पेश की थीं। नासा के इस यान का नाम पहली बार किसी जीवित वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है। 91 साल के पार्कर ने पिछले साल इस यान को देखा था, जिसके ऊपर उनके नाम का अंतिम हिस्सा अंकित है।  इन्होंने 1958 में पहली बार अनुमान लगाया था कि सौर हवाएं होती हैं। आवेशित कणों और चुंबकीय क्षेत्रों की धारा होती हैं, जो सूर्य से निकलती रहती हैं। जब ये धाराएं तेजी से निकलती हैं, तो धरती पर उपग्रह लिंक प्रभावित होता है। ऐसा क्यों होता है, अब मिशन इस रहस्य से ही पर्दा उठाएगा। 

नासा सूरज को छूने को तैयार है
नासा ने सूरज को छूने के अपने ऐतिहासिक मिशन को एक दिन के लिए टालने के बाद आखिर रविवार को रवाना कर दिया है।  प्रक्षेपण से ठीक पहले हीलियम अलार्म बजने की वजह से शनिवार को लॉन्चिंग टाली गई थी। इस यान को डेल्टा-4 रॉकेट से केप कैनवरल स्टेशन से भेजा गया। 85 दिन बाद 5 नवंबर को यह सूर्य की कक्षा में पहुंचेगा। अगले 7 साल तक ये सूर्य के कोरोना के 24 चक्कर लगाएगा। यह दुनिया का पहला ऐसा मिशन है, जो सूर्य के सबसे करीब पहुंचेगा।

पार्कर 1400 डिग्री तापमान सहने में सक्षम और क्या है खासियत
पार्कर 724,000 किमी/घंटे की रफ्तार से चक्कर लगाएगा। यह अब तक किसी यान की सबसे तेज रफ्तार होगी।  यान की लंबाई 9 फीट 10 इंच है और वजन 612 किलो है। इसे बनाने में 10 हजार करोड़ रु. लगे। यान वैज्ञानिक पार्कर के नाम और उनकी की खोज को बढ़ाएगा।  अगर सूर्य और पृथ्वी को एक मीटर स्टिक पर रखा जाए तो दोनों के बीच की दूरी चार सेमी की होगी। पृथ्वी से सूर्य की दूरी 1496 करोड़ किमी है। ये यान सूरज की सतह से 64 लाख किमी की दूरी से गुजरेगा। ये सूर्य और बुध के बीच की दूरी का 10वां हिस्सा है। बुध सूर्य से सबसे करीब है। 
विज्ञापन

NASA-SOLAR
यान क्या खोजेगा
यान भेजने का मकसद है कि वैज्ञानिक सूर्य से निकलने वाली किरणों और सौर आंधी पर शोध करना चाहते हैं। सौर आंधी का असर हम पर पड़ता है। वह जानना चाहते हैं कि क्यों कभी टेक्नोलॉजी पर, तो कभी स्पेसक्रॉफ्ट पर या फिर क्यों संचार सेवाएं बाधित हो जाती हैं। पावर ग्रिड के काम में रुकावट आती है। बड़ा सवाल यह है कि इस मिशन के माध्यम से ऐसे ही कई सवालों के जवाब ढूंढे जाएंगे।  

सूर्य की सतह से क्यों ज्यादा गर्म है कोरोना, अब पता चलेगा  
हम देखते हैं कि हम जब भी आग के पास होते हैं तो गर्मी लगती है। दूर हो जाते हैं तो स्थिति सामान्य हो जाती है, पर सूर्य के साथ ऐसा नहीं है। सूर्य की सतह 10 हजार डिग्री फॉरेनहाइट तक गर्म है। इसका बाहरी वातावरण कोरोना के तापमान का लाखों डिग्री है। सूर्य की सतह से कोरोना क्यों गर्म है, इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए वैज्ञानिकों की खोज को मिलेगा विराम।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें