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अमेरिका: राष्ट्रपति जो बाइडन को लगा करारा झटका, वर्जीनिया राज्य में मिली हार ने झकझोरा

Wed, 03 Nov 2021 10:30 PM IST
कुमार संभव डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, वाशिंगटन
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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : पीटीआई
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अमेरिकी राज्य वर्जीनिया के गवर्नर पद के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की हार से राष्ट्रपति जो बाइडन को जोरदार सियासी झटका लगा है। बीते कुछ दिनों से ऐसे संकेत मिल रहे थे कि इस राज्य में पार्टी का समर्थन आधार खिसक रहा है। इससे डेमोक्रेटिक पार्टी की चिंताएं बढ़ रही थीं। बुधवार सुबह आए चुनाव नतीजे ने उसे पूरी तरह से झकझोर दिया है।

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वर्जीनिया में डेमोक्रेटिक पार्टी 2009 से लगातार जीत रही थी। पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव में भी यहां जो बाइडन को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर भारी बढ़त मिली थी, लेकिन एक साल के अंदर वहां सियासी हवा जिस तरह बदली, उसे राष्ट्रपति बाइडेन की नाकामियों के खिलाफ जनता के गुस्से के रूप में देखा जा रहा है।

मतदान से पहले ब्रिटिश पत्रिका द इकॉनमिस्ट ने एक रिपोर्ट में बताया था कि राष्ट्रपति के इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज और बिल्ड बैक बेटर योजना के पारित न हो पाने से लोगों में डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों में भारी नाराजगी है। आम मतदाता इन दोनों पैकेजों को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी में चल रही अंदरूनी कलह से खफा हैं। वहां पार्टी के उम्मीदवार टेरी मैकऑलिफ के प्रचार में राष्ट्रपति बाइडेन भी गए थे। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी वहां जाकर रैली की थी।
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अखबार द गार्जियन की एक विश्लेषण में कहा गया है कि वर्जीनिया का चुनाव राष्ट्रपति बाइडन का एक कड़ा इम्तिहान था। इसे उनके दस महीनों के कार्यकाल पर एक जनमत संग्रह की तरह देखा जा रहा था। लेकिन मतदान से ठीक पहले राष्ट्रपति की लोकप्रियता में भारी गिरावट देखने को मिली। ताजा जनमत सर्वेक्षण में उनकी एप्रूवल रेटिंग (उनके काम से संतुष्ट लोगों की संख्या) गिरकर 42 फीसदी पर आ गई है।

अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य गैरी कॉनॉली ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘स्पष्टतः राष्ट्रपति की एप्रूवल रेटिंग में गिरावट की वजह से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के लिए मुकाबले में बने रहना कठिन हो गया।’ चुनाव प्रचार के दौरान मैकऑलिफ ने रिपब्लिकन उम्मीदवार ग्लेन यन्गकिन को डोनाल्ड ट्रंप का चेला बताया था। इस तरह उन्होंने मतदाताओं में ट्रंप प्रशासन की यादें ताजा करने की कोशिश की थी। बराक ओबामा ने भी वर्जीनिया में दिए अपने भाषण में कहा था कि अगर डेमोक्रेटिक समर्थकों ने मतदान का उत्साह नहीं दिखाया, तो ट्रंप जैसे उम्मीदवारों का रास्ता साफ होगा।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि ट्रंप का भय दिखा कर वोट लेने की डेमोक्रेटिक पार्टी की रणनीति वर्जीनिया में नाकाम हो गई। प्रगतिशील नीतियों के लिए अभियान चलाने वाले संस्था द प्रोग्रेसिव चेंज कैंपेन कमेटी ने एक बयान में कहा- ‘डेमक्रेटिक पार्टी के नेता अपने विरोधियों को ट्रंप का दूसरा रूप बता कर चुनाव नहीं जीतते रह सकते। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी किसी बड़े विचार को लेकर चलने में नाकाम रहती है और चुनाव में जो साहसी वादे किए गए, उसे पूरा नहीं करती है, तो उससे पार्टी अपने समर्थन आधार को संकुचित कर देती है। तब रिपब्लिकन पार्टी यह मौका मिल जाता है कि वह अपने असली एजेंडे को परदे के अंदर रखते हुए सांस्कृतिक टकराव के मुद्दे उछाल दे।’ डेमोक्रेटिक पार्टी की समर्थक विश्लेषक मनीषा सिंह ने द गार्जियन से कहा- ‘यह डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। हमें अधिक प्रगतिशील बनने की जरूरत है।’

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