अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ का दावा है कि अब अफगानिस्तान में अल कायदा के कुछ ही आतंकवादी बचे हैं। पोम्पिओ ने कहा कि अफगानिस्तान में ज्यादातर आतंकवादियों का सफाया कर दिया गया है। इस दौरान उनका कहना है कि अफगानिस्तान में अमेरिका के जाने का पहला मकसद अल कायदा को खत्म करना था। ऐसे में यह मकसद अब लगभग पूरा हो चुका है।
माइक पोम्पिओ ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका अपनी सुरक्षा करना जानता है। ऐसे में वो अफगानिस्तान, इराक और सीरिया में बगैर हजारों अमेरिकी सैनिकों के भी अपनी सुरक्षा कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने तालिबान को अल कायदा से रिश्ते तोड़ने को कहा है, जो फरवरी में हुए शांति समझौते का एक अहम हिस्सा है। पोम्पिओ ने कहा कि अमेरिका इसके लिए तैयार है और जानता है कि अभी भी उसके बहुत सारे दुश्मन हैं।
पॉम्पियो ने इंटरव्यू में कहा कि तालिबान के साथ हुए लिखित समझौते या किसी और समझौते की ही बात नहीं है। इसे सिर्फ बयान के तौर पर भी नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि हमें इसकी जमीनी हकीकत को देखना ज्यादा जरूरी है कि अमेरिका पर किसी तरह की आंच न आए और यह सुरक्षित रहे।
हालांकि, इस दौरान पोम्पिओ ने यह साफ नहीं किया कि अल कायदा के कितने लड़ाकू आतंकी अभी बचे हैं। इसके अलावा क्या इन आतंकियों में से अब भी कोई तालिबान के साथ मिलकर काम तो नहीं कर रहा?
दरअसल पिछले कई सालों से तालिबान और अल कायदा के रिश्तों के बारे में तमाम तथ्य सामने आ चुके हैं। इसके अलावा यह भी साफ हो चुका है कि अल कायदा के तमाम कमांडर तालिबान के बैनर पर काम करते रहे हैं। ऐसे में अमेरिका का बार बार अपने को सुरक्षित बताना भी इस बात का संकेत है कि अब भी उसके भीतर अल कायदा को लेकर तमाम आशंकाएं हैं। इसी का नजीता है कि तालिबान के साथ समझौता होने के बावजूद भी अमेरिका को यह पूरी तरह ये भरोसा नहीं है कि खतरा टल गया है।