जाहिर है जब चीन पर लगातार कोरोना को दुनिया भर में जानबूझकर फैलाने की साजिश करने का आरोप लग रहा है, ऐसे में उसकी इस पेशकश को तमाम देश किस तरह लेंगे, ये देखने वाली बात होगी।
बावजूद इसके वुहान और अपने चंद शहरों से कोरोना की जंग जीतने के बाद अब दुनिया को ये संदेश देने की कोशिश में लगातार लगा है कि इससे उबरने के लिए भी सब चीन पर ही भरोसा करें और उसकी मदद लें।
चीन का कहना है कि सभी देशों को मिलकर इससे निजात पानी है और इस संकट ने ये साबित कर दिया है कि ये किसी एक के लिए नहीं, बल्कि सबके भविष्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इसके लिए जरूरी है कि हर आदमी अपनी प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) मजबूत करे।
चीन ने इसके लिए आसियान रेस्पांस फंड बनाने के प्रस्ताव का समर्थन किया और कहा कि इसमें आसियान-चीन कोऑपरेशन फंड और एपीटी कोऑपरेशन फंड के जरिये सहयोग किया जाएगा।
चीन ने एपीटी के जरिये जरूरी मेडिकल सुविधाएं और आपातकालीन चीजों की सप्लाई सुनिश्चित कराने का भी भरोसा दिलाया। चीन का ये भी सुझाव है कि एपीटी विश्व स्वास्थ्य संगठन की भी हर संभव मदद करें ताकि दुनिया भर में उसके जरिये कोरोना की लड़ाई को और कारगर बनाया जा सके।
बैठक में चीन के अलावा जापान, कोरिया और आसियान के दस देशों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया और कोरोना के संकट से पूर्वी एशिया के देशों को जल्दी से जल्दी उबारने के रास्ते तलाशने की कोशिश की।
वियतनाम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सहयोग और समर्थन के साथ आगे बढ़ने की जो बात कही गई और खासकर चीन जिस तरह खुद को सबका हमदर्द साबित करने की जी तोड़ कोशिश में दिखा, उससे साफ है कि अब उसका मुख्य मकसद दुनिया के सामने खुद को पाक साफ दिखाना और मदद के नाम पर हर देश को अपना मुरीद बना लेना है, जिसे शायद तमाम देश समझते भी हैं और अपनी रणनीति या कूटनीति उसी तरह बनाने में लगे भी हैं।