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नवालनी की वजह से रूस में पुतिन विरोधी ताकतों में पड़ी फूट

Tue, 09 Feb 2021 02:49 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को

सार

नवालनी साल 2000 में याबलोको पार्टी में शामिल हुए थे। इसके पहले वे एक वामपंथी पार्टी के सदस्य थे। याबलोको में रहते हुए वे धुर दक्षिणपंथी गुटों के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे...
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एलेक्सी नवलनी - फोटो : Social media
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विस्तार
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रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के विरोधी नेता अलेक्सी नवालनी को पश्चिमी देशों का पूरा समर्थन मिल रहा है। लेकिन अपने देश में वे पुतिन विरोधी ताकतों के बीच भी अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। रूस की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता गेन्नादी ज्यूगानोव ने कुछ समय पहले नवालनी के बारे में कहा था कि वे कोई राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं हैं, बल्कि रूस में अमेरिकी धन का प्रतिनिधित्व करते हैं। अब रूस की सबसे बड़ी उदारवादी पार्टी- याबलोको ने नवालनी पर कड़ा हमला बोला है।

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नवालनी की छवि भ्रष्टाचार विरोधी नेता की रही है। लेकिन याबलोको पार्टी के संस्थापक ग्रेगरी यावलिन्स्की ने कहा है कि नवालनी सिर्फ रूसी शासक वर्ग के ऑडिटर हैं, जिनकी जांचों का रूसी समाज के लिए कोई व्यावहारिक नतीजा नहीं है। यावलिन्स्की ने आरोप लगाया कि नवालनी रूस में सामाजिक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

रूस के टीवी चैनल रशिया टुडे की वेबसाइट पर एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यावलिन्स्की के ताजा बयान से रूस में विपक्ष के बीच मौजूद फूट खुल कर सामने आ गई है। यावलिन्स्की ने याबलोको पार्टी की स्थापना 1993 में की थी। इस पार्टी की तरफ से वे तीन बार देश के राष्ट्रपति का चुनाव लड़ चुके हैं। इस पार्टी के ज्यादातर समर्थक युवा और पश्चिमी विचारों से प्रभावित लोग हैं।
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नवालनी के समर्थक भी मोटे तौर पर इन्हीं समूहों से आते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यावलिन्स्की के खुल कर नवालनी के खिलाफ आ जाने से नवालनी की स्थिति कमजोर हो सकती है। जनवरी में लगातार दो रविवार को नवालनी के पक्ष में देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े जन प्रदर्शन हुए थे।

यावलिन्स्की ने एक लेख में लिखा है कि लोकतंत्र, व्यक्तिगत आजादी के सम्मान, और भय और दमन से मुक्त जीवन नवालनी के विचारों से मेल नहीं खाते। यावलिन्स्की ने इस लेख का शीर्षक ‘विदाउट पुतिनिज्म एंड पॉपुलिज्म’ रखा है। लेख में उन्होंने लिखा है- ‘अभी जो लहर उठ रही है, वह पुतिन के खिलाफ है। लेकिन यह रूस के अलोकतांत्रिक भविष्य की तरफ जा रही है। यह या तो अतीत के साम्यवाद या भविष्य फासीवाद के पक्ष में है। नवालनी इस नए विनाश के संभावित नेताओं में एक हैं।’

नवालनी साल 2000 में याबलोको पार्टी में शामिल हुए थे। इसके पहले वे एक वामपंथी पार्टी के सदस्य थे। याबलोको में रहते हुए वे धुर दक्षिणपंथी गुटों के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे। बाद में वे उग्रवादी राष्ट्रवादी गुट 'रशिया मार्च' के कार्यक्रमों में नियमित रूप से देखने जाने लगे। आगे चल कर उनके नस्लवादी विचारों के कारण याबलोको ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया।

यावलिन्स्की ने आरोप लगाया है कि नवालनी नाबालिक युवाओं का इस्तेमाल सामाजिक विभेद पैदा करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने 23 जनवरी और 31 जनवरी को हुए प्रदर्शनों की यह कहकर आलोचना की है कि इनमें शामिल हुए लोगों का ध्यान अत्यधिक रूप से नवालनी पर केंद्रित था। उन्होंने कहा कि इन प्रदर्शनों के दौरान सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई की कोई संगठित मांग पेश नहीं की गई है, ना ही यूक्रेन में युद्ध रोकने की मांग की गई।

रशिया टुडे के मुताबिक यावलिन्स्की के लेख से याबलोको पार्टी में गहरा विवाद पैदा हो गया है। पार्टी की युवा शाखा की सेंट पीटर्सबर्ग इकाई ने यावलिन्स्की की राय की आलोचना की है और कहा है कि इस वक्त जरूरत सभी पुतिन विरोधी ताकतों के एकजुट होने की है। इस इकाई की तरफ से सोशल मीडिया पर डाले गए पोस्ट में कहा गया कि इस वक्त पूरे देश में दमन की लहर आई हुई है।

ऐसे मौके पर विपक्ष का एकजुट रहना जरूरी है। उधर येकातेरिनबर्ग के पूर्व मेयर एवगेनी रोइजमैन ने कहा है कि येवलिन्स्की के इस बयान के बाद अब याबलोको पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ाना उनके लिए संभव नहीं रह गया है। रशिया टुडे का कहना है कि अभी पार्टी के कई और नेता यावलिन्स्की से नाता तोड़ सकते हैं।

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