एक अनुमान के मुताबिक उत्तर कोरिया के विदेशी व्यापार में चीन का हिस्सा 90 फीसदी तक का है। चीन खाने-पीने की चीजें, तेल और औद्योगिक उपकरण का सबसे बड़ा निर्यातक है। जब भी उत्तर कोरिया पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध बढ़े हैं,
चीन ने उत्तर कोरिया की मदद की है। लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान दोनों देशों के बीच रिश्ते बदले हैं। चीन ने पिछले साल यह घोषणा की थी कि वो उत्तर कोरिया से आयात होने वाले कोयले में कमी लाएगा। निर्यात के मामले में उत्तर कोरिया सबसे अधिक कोयला बेचता है।
परमाणु हथियार पर दोनों देशों का रुख
वहीं, चीन के बीबीसी संवाददाता स्टीफन मैकडोनल मानते हैं कि दोनों नेताओं की मुलाकात चौंकाने वाली है। वो कहते हैं, "चीनी मीडिया ने दोनों नेताओं के लिए जो टिप्पणियां की हैं, वो अगर सच है तो यह चौंकाने वाला है।" वो बताते हैं कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किम जोंग-उन ने
शी जिनपिंग से कहा कि दोनों देशों के बीच जो स्थिति पनप रही थी, उससे उन्हें यह महसूस हुआ कि वो खुद बीजिंग पहुंचें।
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन अपने लक्ष्य पर कायम है कि प्रायद्वीप में परमाणु हथियार नष्ट हो। इस पर किम जोंग-उन ने प्रतिक्रिया दी कि यह उनकी प्रतिबद्धता है कि वो परमाणु हथियार नष्ट करेंगे। यह सुनने में थोड़ा अजीब लगे पर इसके पीछे कई कारण हैं। वो इस बात पर बहस कर सकते हैं कि अगर उत्तर कोरिया सुरक्षित महसूस कर रहा है तो ऐसे हथियारों की जरूरत क्या है।