भारत को घेरने की नीति के तहत चीन पड़ोसी देशों में विकास के नाम पर अपनी पैठ मजबूत कर रहा है। श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह को तो वो अपने हाथों में ले ही चुका है। अब उसकी नजर बांग्लादेश के पायरा बंदरगाह पर भी है।
चीन अपनी विकास के नाम पर कब्जे की रणनीति से दुनिया के लिए खतरा बनता जा रहा है। अगर पायरा बंदरगाह की बात करें तो यह बांग्लादेश के लिए रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी है। जो पटुआखली में स्थित है। ये बंदरगाह बंगाल की खाड़ी के तट पर है। वह इसपर कब्जे से समुद्री जाल बिछाना चाहता है।
पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से चीन अरब सागर तक पहुंचना चाहता है। वह श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह के माध्यम से हिंद महासागर में और बांग्लादेश के पायरा बंदरगाह के माध्यम से बंगाल की खाड़ी में पहुंचना चाहता है। वह संबंधित देश को विकास के नाम पर कर्ज में इस हद तक फंसा देता है कि उसे अपने उद्देश्य के पूरा होने को लेकर कोई संदेह ही नहीं रहता है।
चीन का इन कार्यों के पीछे अपने नागरिकों को नौकरी देने का उद्देश्य भी शामिल है। वह इन विकास कार्यों का ठेका अपनी ही कंपनियों को देता है। इन विकास के नाम पर किए जा रहे कार्यों में काम भी चीनी मजदूर ही करते हैं।
यानी कर्ज भी खुद दे रहा है और कर्ज के पैसे जिस कंपनी और मजदूरों पर खर्च हो रहे हैं, वो भी चीन में ही आ रहे हैं। माना जाता है कि पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में चीन के 60 हजार नागरिक काम कर रहे हैं। जबकि जिन देशों में ये काम हो रहे हैं वहां के नागरिकों को इन कार्यों से दूर ही रखा जाता है।