समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसी हफ्ते बुधवार को अपनी एक खोजी रिपोर्ट जारी की थी। उसमें बताया गया था कि अमेजन कंपनी ने कैसे भारत में अपनी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के उत्पादों की नकल कर ली और फिर सर्च में दूसरे ब्रांड्स के ऊपर अपने उत्पादों को दिखाना शुरू किया। सीनेटर ग्रैसली ने एक अलग बयान में कहा है- ‘बड़ी कंपनियों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। अगर वे भेदभाव वाले तरीके अपनाती हैं, तो उसका समाधान हमारा बिल पेश करेगा। वह सुनिश्चित करेगा कि छोटे कारोबारियों को उन प्लेटफॉर्म पर प्रतिस्पर्धा करने के समान धरालत मिलें।’
बड़ी टेक कंपनियों की संस्था चैंबर ऑफ प्रोग्रेस ने दोनों सीनेटरों के बयानों की आलोचना की है। उसने दावा किया है कि प्रस्तावित बिल के जरिए उन उत्पादों पर हथौड़ा चलाने की कोशिश की जा रही है, जिन्हें उपभोक्ता पसंद करते हैं। चैंबर ऑफ प्रोग्रेस की सदस्य कंपनियों में अमेजन, फेसबुक और गूगल शामिल हैं। चैंबर के सीईओ ऐडम कोवासेविच ने कहा कि बिल में उन विचारों को शामिल नहीं किया गया है, जो मतदाताओं के बीच लोकप्रिय हैं। बल्कि यह कॉरपोरेट लॉबिंग का परिणाम है, जिससे प्रतिस्पर्धा में अमेरिकी उत्पादों को नुकसान होगा।
वेबसाइट निक्कई एशिया के मुताबिक क्लोबुचर ने इस साल एंटी-ट्रस्ट के मुद्दों पर एक किताब भी प्रकाशित की है। इसमें उन्होंने कहा है कि अमेरिका में अपनाई गई नीतियों का ही नतीजा यह हुआ है कि अमेरिका बिग टेक कंपनियों को नियंत्रित रखने के मामले में अमेरिका दूसरे देशों खास कर पश्चिमी यूरोप से पिछड़ गया है।