अफगानिस्तान के पंजशीर घाटी में जब तालिबान की एक न चली तो अब वह वार्ता की राह पर चलने का फैसला लिया है। इसी क्रम में तालिबान ने अपने 40 सदस्यों के एक प्रतिनिधमंडल को समझौते के लिए पंजशीर घाटी की सेनाओं के पास भेजा। हालांकि बातचीत का नतीजा अभी सामने नहीं आ सका है। दरअसल अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद और खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर चुके अमरुल्लाह सालेह तालिबान को पंजशीर में घुसने नहीं दे रहे और साफ कह दिया है कि केवल सार्थक बातचीत को स्वीकार किया जाएगा।
सालेह ने साफ कह दिया है कि हम तालिबान को यह एहसास दिलाना चाहते हैं कि बातचीत के माध्यम से ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने काबुल के उत्तर-पश्चिम में पंजशीर घाटी में अपने गढ़ से टेलीफोन द्वारा समचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया।